Bhoomika Narmada Parikrama: आज के युग की श्रवण कुमार! 9 साल की बच्ची बनी दादा-दादी का सहारा, देखें भूमिका की भक्ति ने सबको झुका दिया

Bhoomika Narmada Parikrama: आज के युग की श्रवण कुमार! 9 साल की बच्ची बनी दादा-दादी का सहारा, देखें भूमिका की भक्ति ने सबको झुका दिया

Bhoomika Narmada Parikrama: आज के युग की श्रवण कुमार! 9 साल की बच्ची बनी दादा-दादी का सहारा, देखें भूमिका की भक्ति ने सबको झुका दिया

Bhoomika Narmada Parikrama/Image Source: IBC24

Modified Date: February 3, 2026 / 11:01 am IST
Published Date: February 3, 2026 10:59 am IST
HIGHLIGHTS
  • बच्ची नंगे पैर कर रही नर्मदा परिक्रमा
  • भूमिका की परिक्रमा सोशल मीडिया पर छाई
  • नर्मदे हर की गूंज और बाल-हठ की शक्ति

खरगोन: Bhoomika Narmada Parikrama: नर्मदे हर की गूंज और हाथों में छोटा सा कमंडल लिए मध्य प्रदेश के खरगोन की रहने वाली 9 साल की भूमिका मुकाती इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। जिस उम्र में बच्चे स्कूल और खेल-कूद में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में भूमिका नंगे पैर दादा-दादी के साथ माँ नर्मदा की परिक्रमा पर निकल पड़ी है।

नर्मदे हर की गूंज और बाल-हठ की शक्ति (Bhoomika Mukati Video)

Bhoomika Narmada Parikrama: कक्षा चौथी में पढ़ने वाली भूमिका अपने दादा कड़वाजी और दादी सक्को बाई के साथ पैदल नर्मदा परिक्रमा कर रही है। खरगोन के पीपलझर से शुरू हुआ यह सफर ओंकारेश्वर से 4 दिसंबर को प्रारंभ हुआ। यह दादा की तीसरी और दादी की दूसरी परिक्रमा है, जबकि भूमिका के लिए यह पहला अनुभव है।

रोज़ाना करीब 20 किलोमीटर का सफर तय करने वाली भूमिका की हिम्मत और भक्ति ने सभी को हैरान कर दिया है। दादा-दादी बताते हैं कि उन्होंने रास्ते की कठिनाइयों को लेकर पोती को समझाने की कोशिश की, लेकिन उसकी दृढ़ इच्छा के आगे उन्हें भी झुकना पड़ा। आज हालात यह हैं कि थकान होने पर वही नन्हीं भूमिका दादा-दादी का हौसला बनती है।

भूमिका की कहानी सुन आंखें नम हो जाएंगी (Narmada Parikrama)

Bhoomika Narmada Parikrama: छह बहनों और एक भाई में सबसे लाड़ली भूमिका का झुकाव अब पूरी तरह अध्यात्म की ओर है। पूजा-पाठ, भजन और आरती उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। रोज़ाना लंबा पैदल सफर, सुबह का स्नान और निरंतर भक्ति यह परिक्रमा आस्था और संकल्प की अनोखी मिसाल पेश कर रही है। भूमिका की यह यात्रा साबित करती है कि जब आस्था सच्ची हो, तो उम्र मायने नहीं रखती और चलने वाले पैर नहीं, बल्कि आत्मा होती है।

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सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

टिकेश वर्मा- जमीनी पत्रकारिता का भरोसेमंद चेहरा... टिकेश वर्मा यानी अनुभवी और समर्पित पत्रकार.. जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव हैं। राजनीति, जनसरोकार और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से सरकार से सवाल पूछता हूं। पेशेवर पत्रकारिता के अलावा फिल्में देखना, क्रिकेट खेलना और किताबें पढ़ना मुझे बेहद पसंद है। सादा जीवन, उच्च विचार के मानकों पर खरा उतरते हुए अब आपकी बात प्राथिकता के साथ रखेंगे.. क्योंकि सवाल आपका है।