Mp Khargone Statue: 9.9 लाख का टेंडर पास, मूर्ति बनी 50 हजार की, कलेक्टर और विधायक ने लोकार्पण भी किया, अब छिड़ा विवाद!

Mp Khargone Statue: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में आदिवासी नेता और स्वतंत्रता संग्राम नायक टंट्या मामा भील की प्रतिमा लगाने में बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है।

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  • Publish Date - January 15, 2026 / 02:25 PM IST,
    Updated On - January 15, 2026 / 02:43 PM IST

khargone news/ image source: IBC24

HIGHLIGHTS
  • टंट्या मामा की मूर्ति में भ्रष्टाचार
  • 9.9 लाख रुपये का टेंडर जारी
  • सस्ती फाइबर मूर्ति की असल कीमत 50 हजार

खरगोन: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में आदिवासी नेता और स्वतंत्रता संग्राम नायक टंट्या मामा भील की प्रतिमा लगाने में बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों की शिकायत के बाद यह मामला उजागर हुआ, जिसमें आरोप है कि तिराहे पर लगी प्रतिमा की कीमत बहुत कम थी, जबकि इसके लिए लगभग 9 लाख 90 हजार रुपये का टेंडर जारी किया गया था।

Mp Khargone Statue: 9.9 लाख रुपये का टेंडर जारी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,Mp Khargone Statue मामला खरगोन के बिस्टान नाका तिराहे का है। 24 सितंबर 2025 को नगरपालिका परिषद ने तिराहे के सौंदर्यीकरण के लिए 40 लाख रुपये का बजट पास किया था, जिसमें से लगभग 9 लाख 90 हजार रुपये टंट्या मामा की नई प्रतिमा लगाने के लिए अलग रखे गए थे। प्रतिमा के लिए कलेक्टर की तरफ से साफ निर्देश थे कि यह पक्के पत्थर या धातु की हो।

Khargone News: सस्ती फाइबर मूर्ति की असल कीमत 50 हजार

हालांकि, प्रतिमा लगाई गई और 15 नवंबर 2025 को इसका लोकार्पण विधायक बालकृष्ण पाटीदार, कलेक्टर भव्या मित्तल, नगरपालिका अध्यक्ष छाया जोशी और भाजपा जिलाध्यक्ष नंदा ब्रह्माणे की मौजूदगी में किया गया। समारोह में उपस्थित सभी वीआईपी इस मूर्ति को देखकर प्रसन्न दिखे। लेकिन स्थानीय लोगों और कांग्रेस नेताओं की शिकायत के बाद यह सच सामने आया कि मूर्ति सस्ते फाइबर की बनी थी, Mp Khargone Statue की वास्तविक कीमत लगभग 50 हजार रुपये बताई जा रही है।

Khargone Latest News: कलेक्टर ने जांच और कार्रवाई के आदेश दिए

Mp Khargone Statue मामला सामने आने के बाद कलेक्टर ने तुरंत जांच के आदेश दिए और संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया। वहीं नगरपालिका ने आपात बैठक बुलाकर ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर दिया। ठेकेदार ने खुद को घिरते देख माफी भी मांगी और कहा कि वह फाइबर की मूर्ति दान में देने को तैयार है। इसके साथ ही पुराना टेंडर रद्द कर दिया गया और दोबारा टेंडर जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसमें इस बार सच्चे धातु या पत्थर की प्रतिमा लगाने की बात कही गई है।

स्थानीय लोग और राजनीतिक दल इस घटना को आदिवासी गौरव और क्रांतिकारी नायक के सम्मान का अपमान मान रहे हैं। कांग्रेस ने इसे सकारात्मक संदेश के बजाय भ्रष्टाचार और अनदेखी का उदाहरण बताया। अधिकारियों का कहना है कि अब आगे की कार्रवाई में जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कड़ी कार्रवाई होगी।

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