भोपाल, 11 सितंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य की खनिज संपदा को विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इसके पारदर्शी और पर्यावरण अनुकूल दोहन पर जोर दिया है।
यादव ने यहां बृहस्पतिवार को प्रस्तावित ‘राज्य खनिज अन्वेषण नीति-2026’ की समीक्षा के दौरान कहा कि खनिज नीतियों का उद्देश्य राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार, निवेश और स्थानीय विकास के अवसरों का विस्तार करना होना चाहिए। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई।
मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित नीति को मंजूरी देते हुए अधिकारियों को जनहित में इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जिला खनिज निधि (डीएमएफ) का उचित इस्तेमाल कर खनिज संपदा से समृद्ध सिंगरौली जिले को शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण, कृषि, वन एवं पर्यावरण, सड़क और जलग्रहण क्षेत्र के विकास के लिहाज से एक आदर्श जिला बनाया जाना चाहिए।
यादव ने कहा कि खनिज संसाधनों से होने वाले राजस्व का अधिकतम लाभ जनकल्याणकारी योजनाओं और परियोजनाओं में लगाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कायम करते हुए मध्यप्रदेश को देश के खनिज क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के प्रयास किए जाने चाहिए।
बैठक में खनिज संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल ने बताया कि विभिन्न पहलों के माध्यम से खनिज राजस्व बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नीति के तहत खनिज संसाधनों से होने वाली आय को 2026-27 के अंत तक बढ़ाकर 13,720 करोड़ रुपये और 2030-31 तक 30,000 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य है।
विज्ञप्ति में कहा गया कि राज्य में सबसे अधिक खनिज राजस्व सिंगरौली, अनूपपुर, शहडोल, कटनी, बालाघाट, सतना, जबलपुर, छिंदवाड़ा, उमरिया और बैतूल जिलों से प्राप्त होता है।
इसमें बताया गया कि चालू वित्त वर्ष में जुलाई 2026 के अंत तक इन 10 जिलों के पास डीएमएफ के तहत 3,147.10 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं जिसमें सबसे अधिक योगदान सिंगरौली जिले का है। सभी 55 जिलों में डीएमएफ की कुल राशि 3,574.53 करोड़ रुपये है।
बैठक में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई और खनिज संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
भाषा दिमो मनीषा संतोष
संतोष