मप्र उच्च न्यायालय ने बेटे की मौत के बाद 52 साल की महिला को आईवीएफ प्रक्रिया कराने की अनुमति दी

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मप्र उच्च न्यायालय ने बेटे की मौत के बाद 52 साल की महिला को आईवीएफ प्रक्रिया कराने की अनुमति दी

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  • Publish Date - July 16, 2026 / 10:39 PM IST,
    Updated On - July 16, 2026 / 10:39 PM IST

जबलपुर, 16 जुलाई (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने 52 वर्षीय एक महिला को ‘इन विट्रो फर्टिलाइजेशन’ (आईवीएफ) प्रक्रिया कराने की अनुमति दे दी है।

अदालत ने कहा कि चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ महिला को केवल इसलिए मातृत्व से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि उसने सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत निर्धारित आयु पार कर ली है।

न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने 10 जुलाई को एक महिला और उसके पति द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया। दंपति के इकलौते बेटे की 21 वर्ष की उम्र में पीलिया से मौत हो गई थी।

दंपति अपने बेटे की असामयिक मृत्यु के बाद एक और बच्चा चाहते थे, लेकिन महिला स्वाभाविक रूप से गर्भधारण नहीं कर पा रही थी। इसके बाद उन्होंने आईवीएफ का विकल्प चुना और एक अस्पताल से संपर्क किया। अस्पताल ने आवश्यक जांच के बाद दोनों को चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ पाया।

हालांकि, अस्पताल ने सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए प्रक्रिया को करने से इनकार कर दिया।

अधिनियम के तहत आईवीएफ कराने वाली महिला की उम्र 21 वर्ष से अधिक और 50 वर्ष से कम होनी चाहिए, जबकि पुरुष की उम्र 21 वर्ष से अधिक और 55 वर्ष से कम निर्धारित की गई है।

दंपति ने तर्क दिया कि कानून की कठोर व्याख्या के कारण उन्हें फिर से माता-पिता बनने के अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान उन्होंने प्रक्रिया से जुड़े सभी चिकित्सकीय जोखिमों को वहन करने के संबंध में अदालत में एक हलफनामा भी दाखिल किया।

याचिका स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा कि कानून में दंपति के लिए कोई संयुक्त आयु सीमा निर्धारित नहीं की गई है।

उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि कोई महिला चिकित्सकीय रूप से गर्भधारण करने में सक्षम है तो केवल आयु सीमा उसके मातृत्व की राह में बाधा नहीं बन सकती।

अदालत ने दंपति को किसी भी मान्यता प्राप्त चिकित्सा संस्थान में आईवीएफ प्रक्रिया कराने की अनुमति दी। हालांकि, उसने स्पष्ट किया कि महिला की चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर अंतिम फैसला लेने के लिए अस्पताल स्वतंत्र होगा।

न्यायाधीश ने कहा कि महिला को केवल इस आधार पर आईवीएफ प्रक्रिया से वंचित नहीं किया जाना चाहिए कि उसकी उम्र 52 वर्ष हो चुकी है।

भाषा ब्रजेन्द्र सिम्मी

सिम्मी