कोलकाता, 16 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी छोड़ने की योजना बना रहे बागी नेताओं से बृहस्पतिवार को कहा कि वे 21 जुलाई को आयोजित ‘शहीद दिवस’ रैली से पहले ही पार्टी छोड़ दें। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके जाने से पार्टी कमजोर नहीं होगी।
तृणमूल नेता सदस्य रुक्मिणी मलिक (जिन्हें कोयल मलिक के नाम से भी जाना जाता है) के राज्यसभा से इस्तीफा देने और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात करने के कुछ घंटों बाद, फेसबुक पर एक लाइव सत्र में बनर्जी ने कहा कि रुक्मिणी ने इस्तीफा सौंपने से पहले ही ईमेल के जरिए पार्टी नेतृत्व को अपने फैसले के बारे में बता दिया था।
बनर्जी ने कहा, ‘‘आज मैंने देखा कि एक और सांसद, जो एक सम्मानित और प्रतिभाशाली फिल्म अभिनेत्री भी हैं, ने भाजपा नेता से मुलाकात की और इस्तीफा दे दिया। एक अभिनेत्री के तौर पर मैं उनका सम्मान करती हूं। सभी की जानकारी के लिए बता दूं कि उन्होंने अपना इस्तीफा पहले ही ईमेल से भेज दिया था, और आज व्यक्तिगत रूप से इस्तीफा सौंपने के लिए मैं उन्हें धन्यवाद देती हूं।’’
उन्होंने कहा कि ऐसे और भी लोग हो सकते हैं जो बाहरी दबाव में टीएमसी छोड़ने की योजना बना रहे हैं।
बनर्जी ने आगे कहा, ‘‘जो लोग भाजपा और पुलिस के दबाव में हैं, या अदालती मामले, ईडी, सीबीआई, सीआईडी, स्थानीय पुलिस अधिकारियों या एसटीएफ के दबाव में हैं, उनसे मेरी गुजारिश है कि वे 21 जुलाई से पहले अपना फैसला ले लें। अगर आपको लगता है कि आप ऐसे दबाव के आगे झुककर ही टिके रह सकते हैं, तो कृपया जहां चाहें वहां चले जाएं, भले ही इसका मतलब भाजपा में शामिल होना हो। लेकिन उस पार्टी को बदनाम न करें जिसे हमने मिलकर बनाया है। आपको अपनी आजादी का इस्तेमाल करने का पूरा अधिकार है। लेकिन मैं आपको भरोसा दिलाती हूं कि इससे हम कमजोर नहीं होंगे।’’
बनर्जी ने कहा कि कुछ लोग दबाव झेल सकते हैं और कुछ नहीं।
उन्होंने दावा किया, ‘‘जो लोग हमें छोड़ रहे हैं, वे भी गुप्त रूप से हमारे संपर्क में हैं।’’
मलिक का इस्तीफा टीएमसी के तीन पूर्व सांसदों सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक के भाजपा में शामिल होने और खाली सीट के लिए राज्यसभा उपचुनाव का टिकट पाने के बाद आया है।
राज्यसभा के अलावा, लोकसभा में भी पार्टी की ताकत काफी कम हो गई है। ऐसा तब हुआ जब 20 बागी सांसदों (जिनमें सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार जैसे बनर्जी के लंबे समय के साथी भी शामिल हैं) ने अलग गुट बनाकर कम जानी-पहचानी ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) में विलय कर लिया और भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को समर्थन देने का वादा किया।
बागी नेताओं को एकजुट करने के बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने पार्टी के असली नेतृत्व के तौर पर अपना दावा पेश कर तृणमूल की पहचान की लड़ाई को और तेज कर दिया है।
बनर्जी ने आरोप लगाया कि 21 जुलाई के शहीदों के परिवारों को पुलिस से फोन आ रहे हैं और उनसे कहा जा रहा है कि वे भाजपा का साथ दें। बनर्जी ने दावा किया कि उन परिवारों से कहा जा रहा है कि वे उनके नेतृत्व वाले टीएमसी गुट की रैली में शामिल न हों।
टीएमसी प्रमुख ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने सुधारवादी कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से संपर्क नहीं किया, जो राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) का प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले 19 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘सोनम की इतनी लंबी भूख हड़ताल के बावजूद, सरकार का कोई अधिकारी उनसे नहीं मिला। बातचीत करने में क्या हर्ज है? एक व्यक्ति की जान खतरे में है, फिर भी आप सामान्य शिष्टाचार तक नहीं दिखा रहे हैं। वे मानसून के दौरान खुले आसमान के नीचे बैठे हैं, ऊपर से गरज-चमक के साथ बारिश हो रही है, जबकि प्रशासन उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास कर रहा है। डराने-धमकाने की यह राजनीति खत्म होनी चाहिए।’’
भाषा संतोष अविनाश
अविनाश