मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने भोजशाला विवाद मामले को सुनवाई के लिए इंदौर पीठ के पास वापस भेजा

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मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने भोजशाला विवाद मामले को सुनवाई के लिए इंदौर पीठ के पास वापस भेजा

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  • Publish Date - February 19, 2026 / 12:24 AM IST,
    Updated On - February 19, 2026 / 12:24 AM IST

जबलपुर, 18 फरवरी (भाषा) मध्यप्रदेश के जबलपुर उच्च न्यायालय ने अपनी इंदौर पीठ को भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर विवाद से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करने का बुधवार को निर्देश दिया।

मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने कहा कि विवादित ढांचा धार जिले में स्थित है, जो इंदौर पीठ के अधिकार क्षेत्र में आता है।

पीठ ने कहा कि चूंकि संबंधित पक्ष भी उसी क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए याचिकाओं पर वहीं सुनवाई होनी चाहिए।

प्रधान पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए इंदौर पीठ में 23 फरवरी की तारीख तय की है।

हिंदू समुदाय भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) को समर्पित मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय 11वीं शताब्दी के स्मारक को कमाल मौला मस्जिद होने का दावा करता है। यह परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है।

एएसआई के अप्रैल 2023 के आदेश के अनुसार, हिंदुओं को हर मंगलवार पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुसलमानों को हर शुक्रवार नमाज अदा करने की अनुमति है।

इंदौर से सुनवाई में डिजिटल माध्यम से शामिल हुए हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील विनय जोशी ने बताया कि उच्च न्यायालय का यह निर्देश सभी पक्षों की सुविधा के लिए जारी किया गया है और अब यह सुनवाई इंदौर पीठ के वरिष्ठतम न्यायाधीश करेंगे।

इंदौर पीठ ने 16 फरवरी को उच्चतम न्यायालय के 22 जनवरी 2026 के आदेश का हवाला देते हुए निर्देश दिया था कि लंबित रिट याचिकाओं को तीन सप्ताह के भीतर मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठ न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष रखा जाए।

शीर्ष अदालत ने 22 जनवरी को उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि एएसआई द्वारा सीलबंद लिफाफे में जमा विवादित परिसर की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए और पक्षकारों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए उपलब्ध कराया जाए।

आपत्तियां दर्ज होने के बाद मामले की अंतिम सुनवाई की जाएगी।

उच्चतम न्यायालय ने सभी पक्षों को विवादित परिसर में यथास्थिति बनाए रखने और अंतिम निर्णय तक एएसआई के अप्रैल 2023 के आदेश का पालन करने का निर्देश भी दिया।

भाषा सं ब्रजेन्द्र खारी

खारी