इंदौर, 12 फरवरी (भाषा) केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ श्रमिक संगठनों की बृहस्पतिवार को बुलाई गई राष्ट्रव्यापी हड़ताल का मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर और इसके आस-पास के औद्योगिक क्षेत्रों पर न के बराबर असर पड़ा और आम दिनों की तरह कारखानों में काम जारी रहा।
औद्योगिक संगठन ‘एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्यप्रदेश’ के अध्यक्ष योगेश मेहता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि इंदौर और इसके आस-पास के औद्योगिक क्षेत्रों पर हड़ताल का लगभग कोई असर नहीं देखा गया।
पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के श्रमिक नेता हेमंत हिरोले ने कहा,‘‘हमने कारखानों के मजदूरों से काम रोकने के लिए नहीं कहा क्योंकि हमारी हड़ताल निजी कंपनियों के खिलाफ नहीं है। हम सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं।’’
इंदौर से करीब 30 किलोमीटर दूर पीथमपुर, राज्य का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है। इस औद्योगिक क्षेत्र में करीब 1,250 इकाइयां हैं जहां हजारों मजदूर काम करते हैं। इनमें देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले प्रवासी श्रमिक भी शामिल हैं।
सूबे के सबसे बड़े शहर इंदौर में आवश्यक सेवाओं पर हड़ताल का कोई असर नहीं पड़ा। शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी बिना किसी समस्या के सुचारू रूप से चलती रही।
इस बीच, बैंकिंग, बीमा और अन्य क्षेत्रों के अलग-अलग कर्मचारी संघों के सदस्यों ने अपनी मांगों के समर्थन में शहर में रैली निकाली और केंद्र सरकार की कथित श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया।
हड़ताली श्रमिक संगठनों की तात्कालिक मांगों में चार श्रम संहिताओं एवं नियमों को रद्द करना, बीज विधेयक और विद्युत संशोधन विधेयक तथा ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’ (शांति) अधिनियम को वापस लेना शामिल है।
श्रमिक संगठन मनरेगा को बहाल करने और ‘विकसित भारत -रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025’ को रद्द करने की भी मांग कर रहे हैं।
भाषा हर्ष अमित शफीक
शफीक