भोपाल, 12 फरवरी (भाषा) केंद्र की नीतियों के खिलाफ श्रमिक संगठनों की ओर से द्वारा बृहस्पतिवार को आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल के मद्देनजर मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में विरोध प्रदर्शन हुए लेकिन इसका जन-जीवन पर कोई व्यापक असर नहीं दिखाई दिया।
हड़ताल शांतिपूर्ण तरीके से खत्म हो गयी और इस दौरान बाजार, पेट्रोल पंप, स्कूल और कॉलेज खुले रहे तथा सार्वजनिक परिवहन पूरे दिन सामान्य रूप से चलते रहे।
देश भर के विभिन्न श्रमिक संगठनों ने केंद्र सरकार की कथित मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और राष्ट्र विरोधी कॉरपोरेट नीतियों के विरूद्ध दिन भर की हड़ताल का आयोजन किया है।
अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (एआईडीईएफ) के अध्यक्ष एस एन पाठक ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि राज्य में छह आयुध कारखानों के 25,000 से अधिक असैन्य कामगार विरोध प्रदर्शन के तौर पर एक घंटे देरी से ड्यूटी पर पहुंचे।
उन्होंने कहा, ‘‘हम पूरी तरह से दिन भर की हड़ताल नहीं कर सके क्योंकि रक्षा उत्पादन और संबंधित कार्य आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में आते हैं।’’ उन्होंने दावा किया कि देश भर के 42 आयुध कारखानों में करीब 85,000 कर्मचारी एक घंटे की देरी से पहुंचे।
पाठक ने बताया कि एआईडीईएफ के 423 श्रमिक संघों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
उन्होंने बताया कि ये श्रमिक 506 आर्मी बेस वर्कशॉप, सेंट्रल ऑर्डनेंस डिपो और मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज सहित मध्यप्रदेश के छह आयुध कारखानों में तैनात हैं। एआईडीईएफ ने एक बयान में बताया कि जबलपुर में आयुध निर्माणी, गन कैरिज फैक्टरी, ग्रे आयरन फाउंड्री, वाहन कारखाना जबलपुर, 506 आर्मी बेस वर्कशॉप, केंद्रीय आयुध डिपो और एमईएस के कर्मचारी एक घंटे देरी से काम पर पहुंचे।
जबलपुर में सिविक सेंटर में विरोध प्रदर्शन का कुछ असर दिखा, जहां दुकानें बंद रहीं और बड़ी संख्या में लोग इसमें मौजूद रहे।
नर्मदापुरम जिले के आयुध निर्माणी इटारसी और आयुध निर्माणी कटनी में भी असैन्य श्रमिक देरी से काम पर पहुंचे।
विभिन्न संगठनों से जुड़े श्रमिकों ने भोपाल, नर्नमदापुरम और जबलपुर के अलावा इंदौर ग्वालियर, गुना, कटनी, मंदसौर और इटारसी सहित कुछ स्थानों पर प्रदर्शन किया और सरकार विरोधी नारे लगाए।
औद्योगिक संगठन ‘एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्यप्रदेश’ के अध्यक्ष योगेश मेहता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि इंदौर और इसके आस-पास के औद्योगिक क्षेत्रों पर हड़ताल का लगभग कोई असर नहीं देखा गया।
पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के श्रमिक नेता हेमंत हिरोले ने कहा, ‘‘हमने कारखानों के मजदूरों से काम रोकने के लिए नहीं कहा क्योंकि हमारी हड़ताल निजी कंपनियों के खिलाफ नहीं है। हम सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं।’’
इंदौर से करीब 30 किलोमीटर दूर पीथमपुर, राज्य का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है। इस औद्योगिक क्षेत्र में करीब 1,250 इकाइयां हैं जहां हजारों मजदूर काम करते हैं।
इनमें देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले प्रवासी श्रमिक भी शामिल हैं। राज्य के सबसे बड़े शहर इंदौर में आवश्यक सेवाओं पर हड़ताल का कोई असर नहीं पड़ा। शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी बिना किसी समस्या के सुचारू रूप से चलती रही।
इस बीच, बैंकिंग, बीमा और अन्य क्षेत्रों के अलग-अलग कर्मचारी संघों के सदस्यों ने अपनी मांगों के समर्थन में शहर में रैली निकाली और केंद्र सरकार की कथित श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया।
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) मध्यप्रदेश के महासचिव प्रमोद प्रधान ने बताया कि भोपाल में राष्ट्रीयकृत बैंकों, आयकर विभाग और बीमा क्षेत्र के कर्मचारियों ने प्रेस कॉम्प्लेक्स में विरोध प्रदर्शन किया।
श्रमिकों ने सुबह सरकारी स्वामित्व वाली भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) इकाई के गेट पर भी प्रदर्शन किया।
गुना में सीटू के प्रदेश उपाध्यक्ष विष्णु शर्मा ने दावा किया कि नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल) की विजयपुर इकाई बंद रही और करीब 1,000 श्रमिकों ने हड़ताल में हिस्सा लिया।
एनएफएल विजयपुर के जनसंपर्क अधिकारी विक्रम रावत ने हालांकि कहा कि इससे उत्पादन प्रभावित नहीं हुआ।
सीटू ने कहा कि आशा और उषा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों, कृषि बाजार के मजदूरों, सीमेंट श्रमिकों, नगरपालिका आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों, बिजली क्षेत्र के श्रमिकों, ऑटो और ई-रिक्शा चालकों और अन्य लोगों ने गुना में एक रैली में भाग लिया।
रैली का समापन कलेक्ट्रेट में हुआ, जहां राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा गया।
ग्वालियर में, बैंकों, बीमा कंपनियों और डाक विभाग के कर्मचारी काम पर नहीं आए और यूनियन के सदस्यों ने रानी लक्ष्मीबाई स्मारक के पास विरोध प्रदर्शन किया। माकपा के मध्यप्रदेश महासचिव अखिलेश सिंह ने पीटीआई-भाषा को बताया कि ग्वालियर में हड़ताल श्रम कानूनों के खिलाफ हुई थी और इसमें बैंक, डाक, बीमा और कुछ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
श्रमिक संगठनों की तात्कालिक मांगों में चार श्रम संहिताओं एवं नियमों को रद्द करना, बीज विधेयक और विद्युत संशोधन विधेयक तथा ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (शांति) अधिनियम’ को वापस लेना शामिल है।
श्रमिक संघ मनरेगा की बहाली और ‘विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ को रद्द करने की भी मांग कर रहे हैं।
श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच में इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (आईएनटीयूसी), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी), हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीआईटीयू), ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी), स्वरोजगार महिला संघ (सेवा), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (एआईसीसीटीयू), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (एलपीएफ) और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी) शामिल हैं।
भाषा सं ब्रजेन्द्र जितेंद्र
जितेंद्र