मध्य प्रदेश संगठित जंगल अपराधों को रोकने के लिए कार्यबल बनाएगा: मोहन यादव
मध्य प्रदेश संगठित जंगल अपराधों को रोकने के लिए कार्यबल बनाएगा: मोहन यादव
भोपाल, 19 जून (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संगठित वन अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य ‘टाइगर स्ट्राइक फोर्स’ की तर्ज पर एक विशेष कार्यबल गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने बृहस्पतिवार को वन विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह निर्णय लिया। उन्होंने आंध्र प्रदेश सरकार के अनुरोध पर वहां बाघ और गौर (भारतीय बाइसन) उपलब्ध कराने तथा बदले में जंगली कुत्ते अथवा अन्य वन्यजीव प्रजातियां प्राप्त करने के प्रयास करने के निर्देश भी दिए।
एक सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया कि मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान सरकार ने सोन चिरैया (चिड़िया की एक प्रजाति) उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है और इन्हें राज्य में लाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण को और मजबूत बनाने के लिए वन मुख्यालय में ‘कमान एंड कंट्रोल रूम’ स्थापित करने तथा संगठित वन अपराधों पर रोक लगाने के लिए राज्य स्तरीय कार्यबल के गठन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी।
उन्होंने खनिजों के परिवहन अनुमति शुल्क में वृद्धि के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को ‘राज्य आपदा’ घोषित करने के प्रयास किए जा रहे हैं तथा इससे प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और आपदा मोचन बल ऐसे मामलों का अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधन कर सकेंगे।
वन विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव ने बैठक में बताया कि राजस्थान से लाई जाने वाली सोन चिरैया को मुख्यमंत्री के हाथों घाटीगांव और गांधी सागर वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा।
उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में फिलहाल 52 चीते हैं, जिनमें से 32 का जन्म कूनो राष्ट्रीय उद्यान में हुआ है।
प्रमुख सचिव ने कहा कि सागर जिले स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को राज्य के तीसरे चीता अभयारण्य के रूप में विकसित किया जा रहा है तथा मंदसौर जिले के गांधी सागर अभयारण्य में जुलाई में नर और मादा चीतों के दो जोड़े छोड़े जाने की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि बाघ, चीता, तेंदुआ, भेड़िया, घड़ियाल और गिद्धों की संख्या तथा उनके संरक्षण के मामले में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है।
यादव ने बताया कि कान्हा, बांधवगढ़, पेंच और पन्ना राष्ट्रीय उद्यानों के निकट वन्यजीव बचाव केंद्र बनाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वन विभाग का एक दल जंगली हाथियों के प्रबंधन का अध्ययन करने के लिए पश्चिम बंगाल जा रहा है।
प्रमुख सचिव ने बताया कि केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश के जंगलों में विचरण करने वाले छह हाथियों को रेडियो कॉलर लगाने की अनुमति प्रदान की है तथा राज्य में हाथियों के रखरखाव के लिए सहायक महावतों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि वन प्रबंधन अधिकारियों को वन एवं राजस्व भूमि की सीमा संबंधी विवादों के निपटारे के लिए अतिरिक्त अधिकार दिए जाएंगे।
प्रमुख सचिव ने कहा कि अनूपपुर और डिंडौरी जिलों के जंगलों में ‘साल बोरर आपदा’ देखी गई है जिसके नियंत्रण के लिए संक्रमित पेड़ों की कटाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि साल वृक्षों में होने वाला यह संक्रमण लगभग 30 वर्ष में एक बार आता है, तथाले यह बीमारी 1997 में सामने आई थी।
यादव ने बताया कि इस वर्ष बीड़ी निर्माण में प्रयुक्त तेंदूपत्तों के 17.76 लाख मानक बोरे संग्रहित किए गए हैं और तेंदूपत्ता संग्राहकों को 710.71 करोड़ रुपये का बोनस वितरित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि 700 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की दिशा में भी कार्रवाई की जा रही है।
भाषा दिमो राजकुमार
राजकुमार

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