MLA Arif Masood Bhojshala Statement: भोजशाला पर कोर्ट के फैसले से नाराज हुआ विधायक, बोले- सहमत नहीं, नमाज पढ़ने को लेकर कही ये बात

MLA Arif Masood Bhojshala Statement: भोजशाला पर कोर्ट के फैसले से नाराज हुआ विधायक, बोले- सहमत नहीं, नमाज पढ़ने को लेकर कही ये बात

MLA Arif Masood Bhojshala Statement: भोजशाला पर कोर्ट के फैसले से नाराज हुआ विधायक, बोले- सहमत नहीं, नमाज पढ़ने को लेकर कही ये बात

MLA Arif Masood Bhojshala Statement/Image- AI Generated

Modified Date: May 15, 2026 / 04:41 pm IST
Published Date: May 15, 2026 4:38 pm IST
HIGHLIGHTS
  • हाई कोर्ट ने धार स्थित भोजशाला को माँ सरस्वती का मंदिर माना
  • हिंदू पक्ष को निरंतर पूजा की अनुमति देने के निर्देश दिए गए
  • विधायक आरिफ मसूद ने फैसले पर असहमति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही

धार: MLA Arif Masood Bhojshala Statement मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला पर हाई कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुना दिया है। अदालत ने भोजशाला को मंदिर माना है। कोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा करने की ​इजाजत भी दे दी है। कोर्ट के इस फैसले पर विधायक आरिफ मसूद ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा एएसआई ने गलत तथ्य रखे उसी को मानकर कोर्ट ने फैसला दिया है।

विधायक ने बताया कि वह फैसले से सहमत नहीं है। भोजशाला में नमाज नहीं पढ़ने के फैसले पर कहा कि फिलहाल एडमिनिस्ट्रेशन को ऐसा कोई फैसला नहीं लेना चाहिए, क्योंकि हम लोग सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। उन्होंने (MLA Arif Masood Bhojshala Statement) ये भी कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट से फैसला नहीं होता तब तक मुसलमानों को नमाज पढ़ने से नहीं रोका जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि कानून का मैं सम्मान करता हूं सभी लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसला आने तक संयम बनाए रखें।

इस मामले में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के सीनियर एडवोकेट मनीष दुक्का ने बताया कि कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए भोजशाला को माँ सरस्वती का मंदिर कहा है। कोर्ट ने सरकार को निर्बाध रूप से निरंतर पूजा चालू करवाने के भी निर्देश दिए है। उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि आज से ही पूजा निरंतर रूप से शुरू की जाएगी।

सीनियर एडवोकेट ने आगे बताया कि कोर्ट ने ये भी कहा कि मुस्लिम पक्ष चाहे तो धार में मस्जिद बनाने की अलग ज़मीन की माँग कर सकते हैं, हालांकि वो ज़मीन भोजशाला परिसर की नहीं होगी। कोर्ट ने लंदन से माँ वाग्देवी की मूर्ति लाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी सरकार को निर्देश दिए हैं।

बीजेपी विधायक क्या कहा?

भोजशाला पर बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा (MLA Arif Masood Bhojshala Statement) का बयान सामने आया है, उन्होंने कहा कि यह सनातन की जीत है। न्यायालय पर हमारा विश्वास बना रहा की यहां सत्य जीतेगा और आज इसी सत्य की जीत हुई है। भोजशाला के लिए भी सनातनियों ने लंबी लड़ाई लड़ी है। मैं सनातन के लिए लड़ने वाले करोड़ बलिदानी हिंदुओं को नमन करता हूँ।

विधायक ने आगे कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि मुसलमान भी सत्य को स्वीकार करेंगे और जहां-जहां हिंदुओं के स्मृति चिन्ह है, जिन-जिन मंदिरों को मुगल लुटेरों ने तोड़ा है उनको वापस करके हिंदुओं की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाएंगे।

कोर्ट के इस फैसले के बाद अब हिंदू की बड़ी जीत मानी जा रही है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि हमने पाया है कि इस स्थल पर हिंदू पूजा-अर्चना की निरंतरता कभी समाप्त नहीं हुई है। हम यह भी दर्ज करते हैं कि ऐतिहासिक साहित्य यह स्थापित करता है कि विवादित क्षेत्र भोजशाला के रूप में परमार वंश के राजा भोज से संबंधित संस्कृत शिक्षा के केंद्र के रूप में जाना जाता था।

भोजशाला सुनवाई के प्रमुख बिंदु

  • 12 मई 2026, मंगलवार को इंदौर में भोजशाला प्रकरण की सुनवाई उच्च न्यायालय में पूरी हुई।
  • वर्ष 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा उच्च न्यायालय इंदौर में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय कर हिंदू समाज के पूर्ण आधिपत्य के लिए याचिका क्रमांक 10497/ 2022 लगाई गई थी
  • इसी प्रकरण में आगे चलकर वर्ष 2024 में भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया गया
  • वर्ष 2026 में 23 जनवरी,शुक्रवार वसंत पंचमी के अवसर पर दिनभर अबाधित पूजा अर्चना हेतु सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आदेश इसी प्रकरण में दिया गया था
  • भोजशाला प्रकरण की सुनवाई 6 अप्रैल 2026 से हाईकोर्ट में निरंतर जारी थी
  • अप्रैल 2026 से 9 अप्रैल 2026 तक हिंदू पक्ष की ओर से तर्क रखे गए
  • इसके पश्चात मुस्लिम पक्ष एवं अन्य पक्षों द्वारा तर्क रखे गए
  • इस मुख्य याचिका के साथ ही चार अन्य याचिका और एक अपील भी क्लब थी जिनकी भी सुनवाई पूरी हो गई हैं

हिंदूओं की याचिका की प्रमुख मांगे

  • हिंदू समाज को भोजशाला में अनुच्छेद 25 के अनुसार पूजा का अधिकार मिले तथा मुस्लिम समाज को भोजशाला परिसर में किसी भी धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जावे।
  • केंद्र सरकार को आदेशित किया जावे कि भोजशाला हेतु एक ट्रस्ट बनाया जावे जिससे कि भोजशाला का संचालन एवं प्रबंध किया जा सके।
  • इसी ट्रस्ट को यह आदेशित किया जावे कि माँ सरस्वती की प्रतिमा की पूजा एवं अर्चना निर्बाध रूप से कराई जावे।
  • भोजशाला परिसर में मुस्लिम समाज द्वारा की जा रही नमाज बंद हो।
  • भारतीय पुरातत्व संरक्षण विभाग के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को निरस्त किया जावे एवं हिंदू समाज को नियमित प्रतिदिन पूजा करने का अधिकार मिले।
  • ब्रिटिश म्यूजियम में रखी माँ वाग्देवी की प्रतिमा को पुनः वापस लाया जावे एवं भोजशाला धार में स्थापित किया जावे।

ये भी पढ़ें


सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

जागेश साहू- 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.