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MP Politics News: भोपाल: मध्यप्रदेश की सियासत में जनजातीय समाज का असल हितैषी होने को लेकर बीजेपी-कांग्रेस के बीच सियासी रार छिड़ी ही रहती है। इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS के समवैचारिक संगठन विश्व हिंदू परिषद ने जनजातीय क्षेत्रों में समरसता कार्यक्रमों का आयोजन करने का खाका खींच लिया है। विहिप संगठन – हिंदू नववर्ष के अवसर यानी 19 मार्च से 2 अप्रैल तक प्रदेश के 15 हजार से अधिक स्थानों में सामाजिक समरसता के कार्यक्रम करने जा रहा है। रामजन्मोत्सव के दौरान- महाकौशल, मध्यभारत और मालवा के अलग-अलग हिस्सों में, (MP Politics News) जनजातीय बस्तियों में भगवान राम की तस्वीर रखकर शबरी माता, निषाद राज और केवट से जुड़े प्रसंगों का खासतौर पर जिक्र किया जाएगा।
MP Politics News: विहिप के इस अभियान को लेकर अब एमपी में सियासी बयानबाजियां भी शुरु हो गई है। कांग्रेस आरोप लगा रही है कि- ये सब सूबे के 22 फीसदी ST वोटर्स को बीजेपी के पाले में किए जाने का अभियान है और बीजेपी आदिवासियों की संस्कृति को मिटाने की कोशिश कर रही है। जिसका पलटवार करते हुए बीजेपी ने कहा कि- कांग्रेस ने जनजातीय (MP Politics News) समाज के साथ हमेशा छल किया। भगवान राम और माता शबरी कभी अलग नहीं हो सकते।
MP Politics News: सियासी वार-पलटवार के इतर आंकड़े ये बताते हैं कि- मप्र में 47 विधानसभा सीटें ST के लिए आरक्षित हैं। (MP Politics News) जबकि 80 से ज्यादा सीटें ऐसी हैं जहां ट्राइबल वोटर्स निर्णायक हैं और यहीं से सत्ता की कुर्सी मिलती है। ऐसे में सवाल ये कि- बीजेपी की रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले इन संगठनों के कार्यक्रमों के पीछे- जनजातीय समाज को साधने की सियासी कवायद ही है? सवाल ये भी कि- क्या बीजेपी ने कांग्रेस के “आदिवासी हिंदू नहीं हैं” अभियान की काट ढूंढ़ ली है? सवाल ये भी कांग्रेस- इन सबसे कैसे पार पाएगी?
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