Free Milk Village: एक ऐसा गांव जहां दूध मिलता है बिल्कुल मुफ्त! बेचना माना जाता है पाप, वजह जानकर हैरान रह जाएंगे

Free Milk Village: एक ऐसा गांव जहां दूध मिलता है बिल्कुल मुफ्त! बेचना माना जाता है पाप, वजह जानकर हैरान रह जाएंगे

Free Milk Village: एक ऐसा गांव जहां दूध मिलता है बिल्कुल मुफ्त! बेचना माना जाता है पाप, वजह जानकर हैरान रह जाएंगे

Free Milk Village/Image Source: iStock

Modified Date: January 14, 2026 / 11:00 am IST
Published Date: January 14, 2026 10:58 am IST
HIGHLIGHTS
  • जहां दूध बेचने से डरते हैं लोग
  • जानवर बीमार पड़ने की है मान्यता

नरसिंहपुर: Free Milk Village:  आज हम आपको एक ऐसे गांव की कहानी बता रहे हैं, जहां के लोग आज भी आस्था और परंपरा के सहारे अपनी जीवनशैली को आगे बढ़ा रहे हैं। आज के दौर में जब दूध के बढ़ते दाम आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहे हैं, वहीं मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में एक ऐसा गांव भी है जहां दूध बेचा नहीं जाता बल्कि मुफ्त में बांटा जाता है।

जहां दूध बिकता नहीं, मुफ्त में बंटता है (Narsinghpur Free Milk Village)

Free Milk Village:  महंगाई के इस दौर में यह बात सुनकर हैरानी होना स्वाभाविक है, लेकिन यह पूरी तरह सच है। नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा तहसील के भमका गांव में आज भी एक प्राचीन परंपरा जीवित है, जहां लोग अपनी आस्था के चलते दूध का व्यापार नहीं करते। नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा से करीब आठ किलोमीटर दूर बसे भमका गांव की आबादी लगभग 500 है। गांव में करीब 100 परिवार रहते हैं और अधिकांश लोग कृषि कार्य से जुड़े हुए हैं। गांव में गाय-भैंसों की कोई कमी नहीं है, लेकिन इसके बावजूद यहां का कोई भी किसान दूध नहीं बेचता। ग्रामीणों का मानना है कि गांव पर ग्वाल बाबा, जिन्हें हौलरा ग्वाल दादा के नाम से भी जाना जाता है, का आशीर्वाद है।

महंगाई में चौंकाने वाला गांव! (Bhamka Village Milk Tradition)

Free Milk Village:  ग्रामीणों के अनुसार, प्राचीन मान्यता है कि ग्वाल बाबा स्वयं कभी दूध का व्यापार नहीं करते थे। तभी से गांव के लोग भी इस परंपरा का पालन करते आ रहे हैं। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति चोरी-छिपे दूध बेच देता है, तो उसके पशु बीमार पड़ जाते हैं और कई बार उनकी मौत तक हो जाती है। इसी आस्था और भय के कारण आज भी गांव में दूध का व्यापार पूरी तरह वर्जित है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव में किसी शादी-विवाह, धार्मिक आयोजन या किसी जरूरत के लिए दूध मांगा जाता है, तो उसे बिना किसी मूल्य के मुफ्त में दे दिया जाता है। यहां तक कि मान्यता है कि यदि किसी पशु के बीमार होने पर ग्वाल बाबा के नाम से नारियल चढ़ाया जाए, तो पशु के स्वस्थ होने की भी आस्था है।

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लेखक के बारे में

टिकेश वर्मा- जमीनी पत्रकारिता का भरोसेमंद चेहरा... टिकेश वर्मा यानी अनुभवी और समर्पित पत्रकार.. जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव हैं। राजनीति, जनसरोकार और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से सरकार से सवाल पूछता हूं। पेशेवर पत्रकारिता के अलावा फिल्में देखना, क्रिकेट खेलना और किताबें पढ़ना मुझे बेहद पसंद है। सादा जीवन, उच्च विचार के मानकों पर खरा उतरते हुए अब आपकी बात प्राथिकता के साथ रखेंगे.. क्योंकि सवाल आपका है।