इंदौर, 21 जुलाई (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने नीट-यूजी पुनर्परीक्षा के परिणाम में कथित विसंगति को लेकर एक अभ्यर्थी की याचिका पर मंगलवार को केंद्र सरकार को संक्षिप्त जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह की मोहलत दी।
झाबुआ जिले के छात्र लोकेन्द्र सिंह खड़िया ने याचिका में दावा किया है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की जारी आधिकारिक ओएमआर शीट और उत्तर कुंजी के आधार पर उसके नीट-यूजी पुनर्परीक्षा में 305 अंक बनते हैं, जबकि घोषित परिणाम में उसे केवल 64 अंक दिए गए हैं।
लोकेन्द्र ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके यह कथित विसंगति दूर किए जाने की गुहार लगायी है।
इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ के सामने याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल रोमेश दवे ने कहा कि उन्हें मामले में निर्देश प्राप्त करने और संक्षिप्त जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय चाहिए।
उच्च न्यायालय ने केंद्र को यह मोहलत देते हुए अगली सुनवाई के लिए 28 जुलाई की तारीख तय की।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिनव धनोडकर ने पैरवी की।
धनोडकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि याचिका में एनटीए के गठन, उसके कानूनी दर्जे और संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है।
उन्होंने बताया,‘‘याचिका में कहा गया है कि एनटीए संसद द्वारा स्थापित वैधानिक संस्था नहीं है, बल्कि सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के अंतर्गत पंजीकृत एक सोसायटी है। याचिकाकर्ता ने इसके आधार पर एनटीए की कानूनी स्थिति की न्यायिक समीक्षा किए जाने की भी गुहार लगायी है।’’
मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए नीट-यूजी परीक्षा तीन मई को आयोजित की गई थी, लेकिन प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के कारण 12 मई को इसे रद्द कर दिया गया था। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) इस मामले की जांच कर रहा है।
नीट की पुनर्परीक्षा 21 जून को कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजित हुई थी और इसका परिणाम 16 जुलाई को घोषित किया गया था।
भाषा हर्ष राजकुमार
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