Home » Madhya Pradesh » 60 Sarpanchs resigned from BJP, Everyone is angry at being deprived of public representation rights
Sarpanchs resigned from BJP: 60 सरपंचों ने एक झटके में दे दिया BJP की सदस्यता से इस्तीफा.. जिला पंचायत CEO को भी सौंपा इस मांग का ज्ञापन, पढ़ें पूरा मामला
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सरपंचों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में अनुदान राशि को शहरी क्षेत्रों के बराबर करने की भी मांग की, क्योंकि वर्तमान में आवास निर्माण सामग्री की लागत 2 लाख रुपये तक हो रही है। उन्होंने यह भी शिकायत की कि पंचायत स्तर पर जनसुनवाई में सरपंचों की भूमिका समाप्त कर दी गई है।
60 Sarpanchs resigned from BJP : पन्ना: जिले के 60 से अधिक सरपंचों ने शासन-प्रशासन पर अपने अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए जिला मुख्यालय पहुंचकर भाजपा जिलाध्यक्ष को भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा देने के लिए पत्र सौंपा। साथ ही, जिला पंचायत सीईओ के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी प्रस्तुत किया।
सरपंच संघ के जिलाध्यक्ष संजू शुक्ला ने कहा कि वर्तमान कार्यकाल में सरपंचों के पास निर्णय लेने और फैसले करने का अधिकार नहीं बचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में सरपंचों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है, जिसके विरोध में इस्तीफे की पेशकश की गई है।
60 Sarpanchs resigned from BJP : 27 मार्च 2025 को, जिलेभर के सरपंचों ने भाजपा कार्यालय पहुंचकर जिलाध्यक्ष बृजेंद्र मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद, जिला पंचायत कार्यालय पन्ना पहुंचकर भी ज्ञापन दिया गया। दोनों ज्ञापनों में अपनी सदस्यता से इस्तीफा देने की मांग की गई है।
ज्ञापन में शामिल है ये मांगे
ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल थीं, जिनमें मनरेगा मजदूरी भुगतान प्रणाली को लेकर आपत्ति जताई गई। पहले नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत श्रमिकों की फोटो अपलोड करवाई जाती थी, फिर हेड काउंट किया जाता था। अब मजदूरी भुगतान आई-ब्लिंक प्रणाली से किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और वे पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं।
पंचायत सुनवाई में कोई भूमिका नहीं
60 Sarpanchs resigned from BJP : सरपंचों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में अनुदान राशि को शहरी क्षेत्रों के बराबर करने की भी मांग की, क्योंकि वर्तमान में आवास निर्माण सामग्री की लागत 2 लाख रुपये तक हो रही है। उन्होंने यह भी शिकायत की कि पंचायत स्तर पर जनसुनवाई में सरपंचों की भूमिका समाप्त कर दी गई है।
इसके अलावा, समग्र आईडी पोर्टल पर लगातार आ रही विसंगतियों के कारण नाम जोड़ने और हटाने में हो रही समस्याओं के समाधान की भी मांग की गई है। सरपंचों का कहना है कि इन मुद्दों का निराकरण नहीं किया जा रहा, जिससे वे शासन के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर हो रहे हैं।
सरपंचों ने भाजपा जिलाध्यक्ष को इस्तीफा क्यों सौंपा?
जिले के 60 से अधिक सरपंचों ने अपने अधिकारों के हनन और शासन-प्रशासन द्वारा निर्णय लेने के अधिकार खत्म करने का आरोप लगाते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष को इस्तीफे की पेशकश की और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
सरपंचों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
मनरेगा मजदूरी भुगतान प्रणाली में बदलाव, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की अनुदान राशि को समान करना, पंचायत स्तर पर जनसुनवाई में सरपंचों की भूमिका बहाल करना, समग्र आईडी पोर्टल की विसंगतियों को दूर करना, सरपंचों के अधिकारों को बहाल करना।
सरपंचों को मनरेगा मजदूरी भुगतान को लेकर क्या समस्या हो रही है?
पहले नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत मजदूरों की फोटो अपलोड की जाती थी, लेकिन अब आई-ब्लिंक प्रणाली लागू की गई है, जिससे मजदूरी भुगतान में देरी हो रही है और ग्रामीण श्रमिक पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर सरपंचों की क्या मांग है?
सरपंचों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अनुदान राशि कम होने के कारण निर्माण लागत पूरी नहीं हो पा रही है। वे मांग कर रहे हैं कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में आवास योजना की राशि बराबर की जाए।
अगर मांगें नहीं मानी गईं तो सरपंच क्या कदम उठाएंगे?
सरपंचों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आंदोलन तेज करेंगे और शासन-प्रशासन के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं।