शह मात The Big Debate: बंपर पैदावार, बारदाने पर ‘रार’! सियासी चक्की में कब तक पिसता रहेगा किसान? गेंहू खरीदी पर विपक्ष का सवाल, सरकार की तरफ से आया ये जवाब

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MP Politics News: मध्यप्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीदी भले ही अभी नहीं शुरू हुई, लेकिन गेहूं की खरीदी में लेटलतीफी और बारदाने की कमी को लेकर सियासी जंग जरुर छिड़ गई है।

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  • Publish Date - April 4, 2026 / 11:40 PM IST,
    Updated On - April 4, 2026 / 11:41 PM IST

MP Politics News/Image Credit: IBC24.in

HIGHLIGHTS
  • मध्यप्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीदी भले ही अभी नहीं शुरू हुई।
  • गेहूं की खरीदी में लेटलतीफी और बारदाने की कमी को लेकर सियासी जंग जरुर छिड़ गई है।
  • बीजेपी सरकार और संगठन दोनों, मामले को साधने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।

MP Politics News: भोपाल: मध्यप्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीदी भले ही अभी नहीं शुरू हुई, लेकिन गेहूं की खरीदी में लेटलतीफी और बारदाने की कमी को लेकर सियासी जंग जरुर छिड़ गई है। वैसे खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध से न तो सीधा वास्ता एमपी की सरकार का है, ना ही आम आदमी और किसानों का, लेकिन किसान अमेरिका ईरान युद्ध से परेशान हैं। वज़ह है गेहूँ की बंपर पैदावार के बाद भी बारदाने यानी बोरे के संकट जिसके चलते गेहूँ की ख़रीदी नहीं हो पा रही है। ऐसे में बीजेपी सरकार और संगठन दोनों, मामले को साधने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। (MP Politics News) सरकारी मसलों में अमूमन ज्यादा नहीं बोलने वाले BJP अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सत्ता पक्ष की तरफ़ से मोर्चा संभाला। उन्होंने कहा कि ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध के चलते बारदाने के रॉ मटेरियल की कमी है जिस वज़ह से दो चार दिन की देरी हुई है। सरकार, MSP पर किसानों का पूरा गेहूं खरीदेगी।

बीजेपी भले ही ऑल इज वेल का दावा कर रही है, लेकिन कांग्रेस ने मौके पर चौका मारने में देरी नहीं की। सीधा आरोप लगाया कि- सरकार युद्ध का बहाना बनाकर अपनी गलती छिपा रही। कांग्रेस मंडियों में प्रदर्शन और केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बंगले का घेराव भी करेगी। एमपी में दस करोड़ बारदाने की ज़रूरत है,लेकिन मध्यप्रदेश ने केंद्र सरकार से सिर्फ ढाई करोड़ बारदाने ही मांगे हैं।

एमपी में बारदाने का संकट है ये सब स्वीकार कर रहे हैं, (MP Politics News) लेकिन सवाल ये है कि इसी बीच भाजपा विधायक विष्णु खत्री के वेयर हॉउस में साढ़े छह हज़ार क्विंटल गेहूं रखने के लिए नए बोरे कहाँ से आए थे? सवाल ये भी कि क्या MSP पर दस से पन्द्रह अप्रैल के अंदर खरीदी शुरू हो पाएगी। सवाल ये कि- सरकार को जो रॉ मैटेरियल मिले हैं, क्या उससे खरीदी के लिए बोरे बनकर तैयार हो पाएंगे? और सबसे बड़ा सवाल ये कि -क्या कांग्रेस अपने आन्दोलन और प्रदर्शन से किसानों को जोड़ पाएगी?

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