जातिगत भेदभाव खत्म होने तक जारी रहे आरक्षण: विहिप प्रमुख ने आम्बेडकर जयंती पर कहा

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जातिगत भेदभाव खत्म होने तक जारी रहे आरक्षण: विहिप प्रमुख ने आम्बेडकर जयंती पर कहा

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  • Publish Date - April 14, 2026 / 04:53 PM IST,
    Updated On - April 14, 2026 / 04:53 PM IST

इंदौर (मध्यप्रदेश), 14 अप्रैल (भाषा) विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने मंगलवार को कहा कि जब तक भारतीय समाज में थोड़ा भी जातिगत भेदभाव बाकी है, तब तक देश में आरक्षण की व्यवस्था जारी रहनी चाहिए।

उन्होंने संविधान को ‘‘वर्तमान युग की स्मृति’’ करार देते हुए यह भी कहा कि मानव मात्र की समानता के खिलाफ किसी भी ग्रंथ में लिखी गई हर बात को अस्वीकार किए जाने की जरूरत है।

यहां ‘स्मृति’ का मतलब विद्वानों द्वारा समाज के लिए बनाए गए नियम-कायदों पर आधारित ग्रंथ है।

कुमार, संविधान निर्माता डॉ. बी. आर. आम्बेडकर की 135वीं जयंती पर उनकी जन्मस्थली महू में राज्य सरकार के आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद थे।

कुमार ने विहिप के एक कार्यक्रम के दौरान साधु-संतों के पारित पुराने प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी मनुष्य बराबर हैं और मनुष्यों में ‘छोटा-बड़ा’ व ‘छूत-अछूत’ के सामाजिक भेदभाव भारतीय अध्यात्म के अंग नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि जातिगत अन्याय की एक भी घटना पूरे देश के लिए शर्मनाक बात होती है।

कुमार ने सरकारी शिक्षण संस्थानों और नौकरियों में जातिगत आरक्षण की व्यवस्था की ओर इशारा करते हुए कहा,‘‘हमारा स्पष्ट मत है कि यह आरक्षण प्रायश्चित है और जब तक कहीं थोड़ा भी भेदभाव है, तब तक आरक्षण की आवश्यकता है। इसको (आरक्षण व्यवस्था) चलते रहना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि जब तक समाज का एक बड़ा हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर रहेगा और शिक्षा, उद्योग और व्यापार के क्षेत्रों में पिछड़ा रहेगा, तो समानता नहीं आएगी।

कुमार ने कहा कि देश की अगली लड़ाई अनुसूचित जातियों के लोगों को शिक्षा, कौशल और रोजगार में बराबरी का हक दिलाने की लड़ाई है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह लोगों को नौकर बनाने के बजाय सेठ बनाने की लड़ाई है। इसमें समाज श्रद्धापूर्वक अपना काम करेगा और सरकार अपना दायित्व निभा रही है।’’

कुमार ने समारोह में देश के प्राचीन धर्मशास्त्र ‘मनुस्मृति’ का उल्लेख भी किया।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग समय में अलग-अलग स्मृतियां लिखी जाती रही हैं और कुछ लोग ‘मनुस्मृति’ और अन्य ग्रंथों का जिक्र भी करते हैं।

विहिप अध्यक्ष ने कहा, ‘‘हमारा तो मत यह है कि वर्तमान युग में हम सबको जिस स्मृति का पालन करना है और जिसके आदर्शों को जीना है, वह स्मृति है-भारत का संविधान। जो इसमें लिखा है, वह स्वीकार है।’’

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मानव मात्र की समानता के खिलाफ किसी भी ग्रंथ में लिखी गई हर बात को अस्वीकार किए जाने की जरूरत है।

कुमार ने सामाजिक एकता और समानता के प्रति आम्बेडकर के योगदान को याद करते हुए कहा कि संविधान की प्रस्तावना में ‘भाईचारा’ शब्द उन्हीं की पहल पर जोड़ा गया था।

उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश में संविधान लागू होने पर राजनीतिक समानता आ गई थी और हर नागरिक को वोट देने का अधिकार मिल गया था, लेकिन सामाजिक समानता की लड़ाई अभी पूरी नहीं हुई है।

भाषा हर्ष खारी

खारी

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