23 का ‘तिलिस्म’.. आदिवासी किसके संग? क्या पेसा एक्ट लागू करना सीएम शिवराज का मास्टरस्ट्रोक है?

क्या पेसा एक्ट लागू करना सीएम शिवराज का मास्टरस्ट्रोक है? Shivraj government implemented PESA Act in Madhya Pradesh

23 का ‘तिलिस्म’.. आदिवासी किसके संग? क्या पेसा एक्ट लागू करना सीएम शिवराज का मास्टरस्ट्रोक है?
Modified Date: November 29, 2022 / 08:32 pm IST
Published Date: November 16, 2022 12:11 am IST

सुधीर दंडोतिया/भोपालः Shivraj government implemented PESA Act एक साल के भीतर मध्यप्रदेश सरकार ने देश के तीन बड़े राजनेताओं के ज़रिए जिन योजनाओं को लागू किया, उसका सीधा-सीधा लाभ आदिवासियों को पहुंच रहा है। आदिवासी वर्ग मध्य प्रदेश में 84 विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। सरल भाषा में कहे तो जिधर इनका झुकाव रहा उसकी सरकार बननी तय है। 2018 में आदिवासी वर्ग ने कांग्रेस पर भारोसा जताया जिसका नतीजा आपके सामने था। इधर राहुल गांधी कि मध्यप्रदेश में शुरू होने वाली भारत जोड़ो यात्रा से पहले, राष्ट्रपति मुर्मू के प्रदेश दौरे पर पेसा एक्ट लागू करना सीएम शिवराज का मास्टरस्ट्रोक कहा जा रहा है।

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Shivraj government implemented PESA Act राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शहडोल में जनजातीय गौरव दिवस समारोह के मंच से एमपी में पेसा एक्ट लागू किया। इसके साथ ही एमपी देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया, जहां ये एक्ट लागू है. इस पल को सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी ऐतिहासिक करार दिया। एमपी के आदिवासी लंबे समय से पेसा एक्ट की मांग कर रहे थे। ऐसे में शिवराज सरकार ने राहुल गांधी की एमपी एंट्री से पहले आदिवासियों को बड़ी सौगात देकर सियासी दांव चला है। दरअसल 2018 में कांग्रेस की सत्ता में वापसी की बड़ी वजह आदिवासी वोटर्स रहे। जिन्होंने बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस पर भरोसा जताया। पिछली गलतियों से सबक लेते हुए बीजेपी मिशन 2023 फतह करने के लिए आदिवासी वोटर्स को साधने की रणनीति पर जोर दे रही है।

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बता दें कि ठीक एक साल पहले पीएम मोदी ने 15 नवंबर को राशन आपके ग्राम योजना और सिकलसेल उन्मूलन जैसी योजनाएं लागू की थी। जबलपुर में सितंबर को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में जनजातियों के कल्याण के लिए कुल 14 बड़ी घोषणाएं की गई थी। अब जनजातीय गौरव दिवस अवसर पर राष्ट्रपति की मौजूदगी में पेसा एक्ट कर बीजेपी ने अपनी रणनीति साफ कर दी है

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एक ओर बीजेपी नेता खुद को आदिवासी वर्ग का बड़ा हितैषी बताने में जुटे है तो दूसरी ओर पीसीसी चीफ कमलनाथ छिंदवाड़ा में बिरसा मुंडा की जयंती मनाकर ये संदेश देने की कोशिश की है कि जनजाति वर्ग हमेशा कांग्रेस के साथ है। कुल मिलाकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दल आदिवासियों के साथ होने का दावा कर अपने अपने तर्क दे रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह अगले साल होने वाली विधानसभा चुनाव है। जिसमें अब सिर्फ 10 महीने का समय ही बचा है। लिहाजा सियासी दलों ने उन 84 सीटों पर फोकस बढ़ा दिया है, जहां आदिवासी वोटर निर्णायक हैं यानी आदिवासी वोटर्स का आशीर्वाद जिस दल को मिलेगा..उसकी सत्ता में आने की संभावना बढ़ जाएगी।

 

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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।