इंदौर में कचरे के ढेर से ढूंढ निकाला गया लाखों रुपये का रजत कलश

इंदौर में कचरे के ढेर से ढूंढ निकाला गया लाखों रुपये का रजत कलश

इंदौर में कचरे के ढेर से ढूंढ निकाला गया लाखों रुपये का रजत कलश
Modified Date: July 20, 2026 / 03:05 pm IST
Published Date: July 20, 2026 3:05 pm IST

इंदौर (मध्यप्रदेश), 20 जुलाई (भाषा) घास के ढेर में सुई खोजने वाली कहावत तो आपने सुनी होगी, लेकिन देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में नगर निगम के कर्मचारियों ने कचरे के कई टन वजनी ढेर में दबे चांदी के एक कलश को खोजकर इसे हकीकत में बदल दिया है।

अधिकारियों ने बताया कि राजेंद्र नगर क्षेत्र के एक परिवार की बुजुर्ग महिला ने 18 जुलाई को अपने घर के कचरे के साथ अनजाने में वह थैली भी नगर निगम के अपशिष्ट संग्रहण वाहन में डाल दी जिसमें चांदी का करीब दो किलोग्राम वजनी कलश रखा था।

उन्होंने बताया कि थैली बंद थी और कचरे की दूसरी थैलियों के बीच रखी थी, इसलिए नगर निगम के किसी भी कर्मचारी को महिला की गलती का अंदाजा नहीं हुआ।

अधिकारियों के मुताबिक महिला के घर में जब कलश नहीं मिला, तो उसके परिवार के होश उड़ गए क्योंकि यह पुश्तैनी धरोहर के रूप में सहेजकर रखा गया था और इसे पूजा-पाठ में इस्तेमाल किया जाता था।

घबराए परिवार ने नगर निगम अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन तब तक कलश लंबी यात्रा तय कर चुका था।

अधिकारियों ने बताया कि चांदी के कलश को दूसरे कचरे के साथ पहले एक अपशिष्ट स्थानांतरण स्टेशन ले जाया गया और वहां से इसे शहर के ट्रेंचिंग ग्राउंड के केंद्रीकृत कचरा प्रसंस्करण केंद्र पहुंचा दिया गया।

मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक (सीएसआई) विजय यादव ने सोमवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “शुरुआत में हमें लगा कि इस कलश को ढूंढना लगभग नामुमकिन है क्योंकि प्रसंस्करण केंद्र में हर रोज पूरे शहर का सैकड़ों टन कचरा पहुंचता है। यह सचमुच घास में सुई खोजने जैसा काम था।”

यादव ने बताया कि प्रसंस्करण केंद्र में कचरे की छंटाई करने वाले कर्मचारियों को चांदी के कलश के बारे में सूचना दी गई। इस केंद्र में प्लास्टिक, धातु, तार, थर्माकोल, जूते-चप्पल और अन्य वस्तुएं अलग-अलग की जाती हैं और बाद में उनका प्रसंस्करण किया जाता है।

उन्होंने बताया, ‘‘प्रसंस्करण केंद्र के कर्मचारियों ने कलश को धातु के कबाड़ के कई टन वजनी ढेर में रख दिया था क्योंकि किसी भी व्यक्ति को अंदाजा नहीं था कि यह चांदी का है।’’

सीएसआई ने बताया कि महिला के परिवार ने नगर निगम अधिकारियों को कलश की तस्वीर उपलब्ध कराई जिसके बाद कर्मचारियों ने इसकी खोजबीन शुरू की।

उन्होंने बताया, ‘‘हमें दो दिन की खोजबीन के बाद ऐसा कलश मिला जिसकी बनावट इस तस्वीर से मेल खा रही थी। कलश पर संबंधित परिवार का नाम भी उकेरा हुआ था। परिवार को जब कलश मिलने की सूचना दी गई, तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।’’

यादव ने हालांकि कहा कि अगर नगर निगम को कलश गुम होने की सूचना देर से मिलती, तो इस बर्तन का बचना मुश्किल था।

उन्होंने बताया कि प्रसंस्करण केंद्र में छंटाई के बाद धातु के कबाड़ को मशीनों से दबा दिया जाता है जिसके बाद किसी एक बर्तन की पहचान करना असंभव हो जाता।

चांदी के कलश को कचरा जमा करने वाली गाड़ी में गलती से डालने वाली बुजुर्ग महिला फिलहाल अपने परिवार के साथ धार्मिक यात्रा पर शहर से बाहर हैं और उनका कलश अमानत के तौर पर क्षेत्रीय पार्षद प्रशांत बड़वे के पास रखा है।

महिला ने अपना नाम जाहिर न किए जाने की शर्त पर कहा, ‘हमारे पुश्तैनी कलश का मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं है। इसे खोजने के लिए नगर निगम कर्मचारियों की जितनी तारीफ की जाए, कम है।’

पार्षद बड़वे ने बताया कि चांदी के कलश का वजन करीब दो किलोग्राम है और वर्तमान दरों के मुताबिक इसकी कीमत चार से पांच लाख रुपये के बीच आंकी जा रही है।

चांदी का कलश खोज निकालने वाले नगर निगम कर्मचारियों की ईमानदारी और मेहनत की सराहना करते हुए क्षेत्रीय नागरिकों ने उनका सम्मान किया।

भाषा

हर्ष रवि कांत


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