कटौती का ‘करंट’…बिजली पर बवाल…अभी भी बिजली और कोयला संकट की स्थिति बरकरार या विपक्ष की कोरी सियासत?

अभी भी बिजली और कोयला संकट की स्थिति बरकरार या विपक्ष की कोरी सियासत? Still situation of power and coal crisis or politics of opposition?

Edited By: , May 21, 2022 / 11:57 AM IST

रिपोर्ट- विजेन्द्र पाण्डेय, भोपाल: Bhopal power Crisis News  मध्यप्रदेश में बिजली को लेकर सियासत थमने का नाम नहीं ले रहा। प्रदेश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन कर रही कांग्रेस ने सरकार को एक बार फिर कठघरे में खड़ा करते हुए सवाल पूछा है कि खुद को सरप्लस पावर स्टेट कहने वाले मध्यप्रदेश में बिजली कटौती क्यों हो रही है? हालांकि ऊर्जा मंत्री विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए दावा कर रहे हैं कि हालात दुरुस्त हैं। अब सवाल ये है कि क्या अभी भी बिजली और कोयला संकट की स्थिति बरकरार है या फिर विपक्ष कोरी सियासत कर रहा है?>>*IBC24 News Channel के WhatsApp  ग्रुप से जुड़ने के लिए Click करें*<<

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Still power Crisis मध्यप्रदेश में इन दिनों बिजली कटौती पर बवाल मचा हुआ है। कांग्रेस आए दिन सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रही है। गुरुवार को भी अघोषित बिजली कटौती और बढ़े हुए बिजली बिलों के विरोध में कांग्रेस ने विद्युत वितरण कंपनी के ऑफिस के बाहर प्रदर्शन किया और सवाल पूछा कि सरकार मांग से ज्यादा बिजली की उपलब्धता का दावा करती है तो बिजली कटौती क्यों हो रही है और अगर बिजली की उपलब्धता कम है तो बिजली दूसरे राज्यों को क्यों दी जा रही है? साथ ही चेतावनी दी कि अगर बिजली कटौती के हालात नहीं सुधरे तो कांग्रेस इससे भी बड़ा प्रदर्शन करेगी।

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दूसरी ओर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों को महज़ सियासी बता रहे हैं। ऊर्जामंत्री के मुताबिक बिजली का संकट कुछ दिन पहले जरुर था लेकिन अब अघोषित बिजली कटौती की नौबत नहीं है। हालांकि कांग्रेस इससे इत्तेफाक नहीं रखती।

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एक और बिजली कटौती को लेकर सियासी बयानबाजी चरम पर है, तो दूसरी ओर सतना में बिजली विभाग के खिलाफ किसान एक महीने से अनशन पर बैठे हैं जो खेतों में बिजली के टावर लगाने के बदले मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। मुआवजा नहीं मिलने के कारण किसान बोरिया-बिस्तर लेकर बिजली टावर पर चढ़े हैं। कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में बिजली को लेकर कई मोर्चों पर बवाल मचा हुआ है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के अपने-अपने दावे हैं। अब सवाल ये है कि आखिर सच्चाई क्या है? क्या डिमांड के मुताबिक बिजली की सप्लाई हो रही है या फिर कांग्रेस सिर्फ सियासत के लिए सड़क पर उतर रही है।

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