लंबे युद्ध से निपटने के लिए मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और औद्योगिक क्षमता आवश्यक : राजनाथ
लंबे युद्ध से निपटने के लिए मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और औद्योगिक क्षमता आवश्यक : राजनाथ
(फोटो के साथ)
जबलपुर, 27 अगस्त (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि दुनिया में मजबूत आपूर्ति श्रृंखला, सुदृढ़ औद्योगिक क्षमता और तेजी से नवाचार करने की क्षमता रखने वाले देश लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों का बेहतर ढंग से सामना करने में सक्षम होते हैं।
उन्होंने यह बात चार साल से अधिक समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में कही।
राजनाथ ने कहा कि इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि महत्वपूर्ण रक्षा जरूरतों के लिए भारत की सशस्त्र सेनाएं विदेशी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भर न रहें।
रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य देश में ही रक्षा उपकरणों का निर्माण करना, उनकी मरम्मत और रखरखाव का कार्य देश में ही करना, मौजूदा प्रणालियों को आधुनिक प्रौद्योगिकियों से उन्नत करना और अगली पीढ़ी की क्षमताओं का स्वदेशी रूप से विकास करना है।’’
उन्होंने कहा कि ये प्रयास वैश्विक विनिर्माण केंद्र, विश्वसनीय प्रौद्योगिकी साझेदार और भरोसेमंद रक्षा साझेदार के रूप में भारत के उभरने को दर्शाते हैं।
राजनाथ ने 57 साल पुराने व्हीकल फैक्टरी जबलपुर (वीएफजे) में टी-सीरीज के युद्धक टैंकों के ओवरहाल के लिए 472 करोड़ रुपये की लागत वाली सुविधा की आधारशिला रखने के बाद ये बातें कहीं।
युद्ध के बदलते स्वरूप को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि उन्नत प्रौद्योगिकी, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला, सुदृढ़ औद्योगिक क्षमताओं और गतिशील नवाचार तंत्र वाले देश लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों के दौरान खुद को बनाए रखने की बेहतर स्थिति में होंगे।
राजनाथ ने कहा कि टी-सीरीज टैंक ओवरहाल सुविधा विभिन्न प्रकार के यांत्रिक, विद्युत, इलेक्ट्रॉनिक और हाइड्रोलिक कलपुर्जों, असेंबलियों और उप-प्रणालियों की मांग पैदा करके एक मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला तैयार करने में मदद करेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘इन वस्तुओं की खरीद से टैंक ओवरहाल से जुड़े विनिर्माण और सहायक सेवाओं के क्षेत्र में स्थानीय एमएसएमई के लिए अवसर पैदा होंगे और एक मजबूत तथा आत्मनिर्भर औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में मदद मिलेगी।’’
रक्षा मंत्री ने कहा कि यह परियोजना सैनिकों के लिए लाभकारी साबित होगी और जबलपुर तथा आसपास के क्षेत्रों में कामगारों, युवाओं, छोटे उद्यमियों और स्थानीय आबादी के अन्य वर्गों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगी।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ड्रोन, सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों, मिसाइलों, उपग्रहों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर युद्ध के आगमन के साथ युद्ध का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, लेकिन टैंकों की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है बल्कि उनका स्वरूप विकसित हुआ है।
उन्होंने कहा, ‘‘आधुनिक युद्ध में किसी एक प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहने के बजाय संयुक्त क्षमताओं की आवश्यकता है। टैंक, पैदल सेना, तोपखाना, ड्रोन, वायु शक्ति, निगरानी और सटीक मारक हथियार मिलकर एक एकीकृत युद्ध प्रणाली बनाते हैं।’’
राजनाथ ने कहा कि टैंकों को आधुनिक युद्धक्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप बेहतर सेंसर और उन्नत क्षमताओं से लैस करने की आवश्यकता है।
रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘हमारा ध्यान सैनिकों को ड्रोन, मिसाइल, तोपखाना, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता, ऊर्जा हथियार और आधुनिकीकृत टैंक उपलब्ध कराने पर है तथा इनके बीच निर्बाध समन्वय सुनिश्चित करने पर भी जोर है। यह ओवरहाल सुविधा इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगी।’’
आगामी परियोजना के तहत जबलपुर स्थित सुविधा में टी-72 और टी-90 टैंकों का ओवरहाल (आमूल चूल परिवर्तन के साथ उन्नत बनाना) किया जाएगा। इससे भारतीय सेना की इन युद्धक टैंकों के रखरखाव की वार्षिक आवश्यकता पूरी करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
राजनाथ ने कहा कि तमिलनाडु के अवाडी स्थित हेवी व्हीकल्स फैक्टरी ने पिछले चार दशकों में सेना को करीब 4,400 टैंक उपलब्ध कराए हैं, जो भारत की बख्तरबंद क्षमता में उसके महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि नयी परियोजना जबलपुर की पहचान को रक्षा प्रौद्योगिकी, रखरखाव, आधुनिकीकरण और विनिर्माण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में और मजबूत करेगी।
उन्होंने विश्वास जताया कि टी-72 और टी-90 श्रेणी के टैंकों के ओवरहाल का अनुभव रखने वाली आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (एवीएनएल) गुणवत्ता, उत्पादकता, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करेगी। टैंक ओवरहाल सुविधा जहां स्थापित की जा रही है, वह वीएफजे एवीएनएल के तहत संचालित एक प्रमुख सैन्य वाहन विनिर्माण इकाई है।
वर्ष 1969 में स्थापित इस फैक्टरी में शुरुआत में जर्मनी की एमएएन के सहयोग से शक्तिमान तीन टन वाहनों तथा जापान की निसान मोटर्स कंपनी के सहयोग से निसान 1टी और जोंगा वाहनों का उत्पादन किया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि मध्यप्रदेश के इस शहर में स्थित फैक्टरी परिसर 330 एकड़ में फैला है, जबकि इससे लगा एस्टेट 600 एकड़ में विस्तृत है।
भाषा
दिमो रवि कांत रवि कांत

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