राज्यसभा चुनाव में ऐसी ‘चोरी’ हुई है, जिसमें केंद्र से लेकर सभी मिले हुए हैं: दिग्विजय सिंह

राज्यसभा चुनाव में ऐसी ‘चोरी’ हुई है, जिसमें केंद्र से लेकर सभी मिले हुए हैं: दिग्विजय सिंह

राज्यसभा चुनाव में ऐसी ‘चोरी’ हुई है, जिसमें केंद्र से लेकर सभी मिले हुए हैं: दिग्विजय सिंह
Modified Date: June 11, 2026 / 09:07 pm IST
Published Date: June 11, 2026 9:07 pm IST

भोपाल, 11 जून (भाषा) मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीनों उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जाने पर बृहस्पतिवार को कड़ी आपत्ति जताई।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह ऐसी ‘‘चोरी’’ है, जिसमें केंद्र से लेकर राज्य तक सभी संस्थाएं शामिल हैं।

सिंह ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से बातचीत में कहा, ‘‘जब चोरी हुई है और इस चोरी में सभी लोग शामिल हैं। न केवल राज्य, बल्कि केंद्र भी… निर्वाचन आयोग भी… और मुझे यह कहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है कि उच्चतम न्यायालय भी।’’

उन्होंने सवाल उठाया कि जब उच्चतम न्यायालय को यह मालूम था कि भाजपा उम्मीदवारों को निर्वाचित घोषित किया जा सकता है, तो उसने याचिका पर सुनवाई के लिए शुक्रवार की तारीख क्यों निर्धारित की।

सिंह ने कहा, ‘‘यह सब मिली-जुली चोरी है।’’

राज्यसभा चुनाव के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा ने मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए भाजपा उम्मीदवार तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया।

कांग्रेस ने इस चुनाव में मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन शपथपत्र में जानकारी छिपाने के आरोप में उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया। कांग्रेस ने इस निर्णय को अवैध बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने पर्याप्त संख्या बल न होने के बावजूद तीसरी राज्यसभा सीट हासिल करने के लिए साजिश रची है।

निर्वाचन अधिकारी शर्मा द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के दौरान पाया गया कि नटराजन ने नामांकन पत्र के साथ जमा किए गए फॉर्म-26 में अदालत में दायर एक शिकायत का उल्लेख नहीं किया था, जिसके कारण उनका हलफनामा अधूरा माना गया।

नटराजन ने इस फैसले को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया है। शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने की बात कही है।

इस संबंध में पूछे जाने पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘मीनाक्षी नटराजन जैसा गांधीवादी व्यक्ति मैंने राजनीति में नहीं देखा। उन्हें इस तरह चुनावी प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, मानो उन्होंने कोई गंभीर अपराध किया हो। यह कैसा मजाक है?’’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी भाजपा के तीनों उम्मीदवारों को निर्वाचित होने का प्रमाणपत्र दिए जाने को प्रदेश की जनता और लोकतंत्र के साथ धोखा बताया।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘जब कांग्रेस की शिकायत पर निर्वाचन आयोग ने अभी तक फैसला नहीं सुनाया है और उच्चतम न्यायालय में कल सुनवाई होनी है, तब इस तरह की जल्दबाजी लोगों की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश है।’’

कमलनाथ ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के ‘‘षड्यंत्रपूर्वक अपहरण’’ का मामला बताते हुए आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाएं अपना दायित्व निभाने के बजाय भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस न्यायिक और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर इस ‘‘अन्याय’’ का विरोध करेगी।

मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 18 जून को मतदान प्रस्तावित था। ये सीटें भाजपा के जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त होने के कारण रिक्त हो रही हैं। तीनों सदस्यों का कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त होगा।

मध्यप्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 164 विधायक हैं। संख्या बल के आधार पर भाजपा दो सीटें आसानी से जीत सकती थी, जबकि तीसरी सीट पर कांग्रेस की दावेदारी मजबूत मानी जा रही थी।

राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 58 मतों की आवश्यकता थी। ऐसे में भाजपा के तीसरे उम्मीदवार की जीत अतिरिक्त वोटों, क्रॉस-वोटिंग या विपक्षी सदस्यों के मतदान से अनुपस्थित रहने पर निर्भर मानी जा रही थी।

हालांकि, नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मतदान की आवश्यकता ही नहीं रही और निर्वाचन अधिकारी ने भाजपा के तीनों उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया।

भाषा

ब्रजेन्द्र रवि कांत


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