इंदौर,16 अप्रैल (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने इंदौर नगर निगम के एक सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार करने वाली दो कांग्रेस पार्षदों से एक जनहित याचिका पर बृहस्पतिवार को जवाब तलब किया।
याचिका में सरकारी और सार्वजनिक मंचों पर ‘वंदे मातरम’ के गायन के दौरान मौजूद लोगों का गरिमापूर्ण आचरण सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट कानूनी ढांचे की गुहार की गई है।
उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने याचिका पर स्थानीय पार्षदों-फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल खान के साथ ही राज्य सरकार को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करके जवाब मांगा।
याचिका स्थानीय वकील योगेश हेमनानी ने दायर की है। हेमनानी ने उच्च न्यायालय में खुद पैरवी करते हुए आरोप लगाया कि दोनों महिला पार्षदों ने नगर निगम सम्मेलन के दौरान ‘वंदे मातरम’ गाने से न केवल इनकार किया, बल्कि अपने आपत्तिजनक बयानों से राष्ट्रीय गीत के प्रति अनादर भी जताया।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि निर्वाचित जन प्रतिनिधियों का यह आचरण नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों से जुडे़ संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 के तहत दंडनीय भी है।
अदालत ने याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख तय की।
इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान आठ अप्रैल को कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम ने इस्लामी मान्यताओं का हवाला देते हुए ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार कर दिया था। निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस में शामिल होने वाली एक अन्य पार्षद रुबीना इकबाल खान ने भी फौजिया के इस रुख का समर्थन करते हुए राष्ट्रीय गीत गाने से मना कर दिया था।
पुलिस ने दोनों पार्षदों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 (अलग-अलग समुदायों के आपसी सद्भाव पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कृत्य) के तहत मामला दर्ज किया है।
भाषा
हर्ष पारुल
पारुल