देखिए चाचौड़ा विधानसभा के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड

देखिए चाचौड़ा विधानसभा के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड

देखिए चाचौड़ा विधानसभा के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड
Modified Date: November 29, 2022 / 08:08 pm IST
Published Date: October 4, 2018 11:14 am IST

भोपाल। महासमर 2018 जैसे जैसे नजदीक आ रहा है सियासत की बिसात पर हलचल भी तेज होती जा रही है। नई नई चालें चलीं जा रही हैं दुश्मन को घेरने के लिए तमाम पैंतरेबाजी चल रही है और सियासत के इसी गहमा गहमी के बीच हम मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधायक जी का पूरा रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रहे हैं आज बारी है मध्यप्रदेश के चाचौड़ा विधानसभा सीट की। 

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चाचौड़ा विधानसभा गुना जिले में आने वाली इस सीट पर भले बीजेपी  का कब्जा हो। लेकिन लंबे समय तक यहां कांग्रेस का दबदबा रहा..इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1990 के बाद 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी जीतने में सफल रही। फिलहाल बीजेपी की ममता मीना यहां से विधायक हैं। चुनाव नजदीक है तो सीट पर सियासी पैंतरेबाजी शुरू हो चुकी है। मुद्दे और मसले भी गूंजने लगे हैं। आने वाले चुनाव में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे ही बड़े सियासी मुद्दा बनते नजर आ रही है।

ये तस्वीरें बताती है कि चाचौड़ा विधानसभा क्षेत्र में विकास की रफ्तार क्या है। 80 फीसदी ग्रामीण परिवेश वाली इस विधानसभा क्षेत्र की जनता आज भी सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और रोजगार के लिए मोहताज है। गुना जिले में आने वाली चाचौड़ा विधानसभा ने प्रदेश को मंत्री के साथ मुख्यमंत्री भी दिया।कभी कांग्रेस की मजबूत गढ़ रही इस विधानसभा में फिलहाल बीजेपी की ममता मीना विधायक हैं। सत्ता बदली चेहरा बदला लेकिन चाचौड़ा की तस्वीर नहीं बदली। हालात ये है कि मजदूरी की राशि या पेंशन लेने के लिए लोगों को कई-कई दिनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाना पड़ता है।

ऐसा नहीं है कि ये समस्याएं केवल ग्रामीण क्षेत्रों में ही नजर आती है।  बल्कि चाचौड़ा, बीनागंज और कुंभराज जैसे शहरी इलाकों में भी जरूरी सुविधाओं के लाले हैं। बारिश के दिनों में इन सड़कों पर चलना काफी मुश्किल हो जाता है। वहीं लोगों में उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी काफी नाराजगी देखी जा सकती है। विधानसभा की इस हालत के लिए कांग्रेस के साथ बीजेपी एक-दूसरे के कार्यकाल को जिम्मेदार ठहरा रही हैं। कुल मिलाकर चाचौड़ा विधानसभा में समस्याओँ की कोई कमी नहीं है और दोनों प्रमुख राजनीतिक दल इन समस्याओँ के लिए एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। ऐसे में क्षेत्र की जनता दोनों ही सियासी दलों से सवाल करेगी। 

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चाचौड़ा के सियासी समीकरण की बात करें तो यहां पार्टियों की जीत-हार कास्ट फैक्टर से तय होती है। मीना समाज बाहुल्य इस विधानसभा पर पिछले पांच बार से दूसरी जाति के प्रत्याशी तमाम कोशिशों के बाद भी जीत हासिल नहीं कर पाए। लिहाजा बीजेपी को भी आखिरी दांव मीना कार्ड के रूप में चलना पड़ा और इसी समीकरण के बलबूते चाचौड़ा में बीजेपी की वापसी हुई।

चाचौड़ा में चुनाव कोई भी जीते लेकिन चर्चा मीना की ही होती है। जी हां चाचौड़ा में पार्टियों की हार जीत में अहम सियासी फैक्टर हैं  मीना। दरअसल यहां दो लाख 6 हजार मतदाताओं में से 55 हजार से अधिक मीना समाज के वोटर्स हैं। कांग्रेस ने लंबे समय तक मीना कार्ड के जरिए यहां राज किया। लेकिन 2013 में बीजेपी ने मीना प्रत्याशी के दम पर ही कांग्रेस को मात देने में सफल हुई

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वैसे सीट के सियासी इतिहास की बात की जाए तो 1951 में यहां हिंदी महासभा के द्वारकादास विधायक चुने गए। इसके बाद 1957 में कांग्रेस के सागरसिंह सिसौदिया विधायक चुने गए तो 1962 में प्रभुलाल यहां से विधायक बने 1980 में कांग्रेस प्रत्याशी देवेंद्र सिंह चाचौड़ा सीट से जीते। 1985 में भी देवेंद्र सिंह ने बीजेपी प्रत्याशी रामबहादुर सिंह परिहार को पराजित किया 1990 में सीट बीजेपी के कब्जे में पहुंची और रामबहादुर सिंह विधायक चुने गए 1993 से 2008 तक कांग्रेस के शिवनारायण मीना लगातार चार बार विधायक चुने गए। हालांकि 1993 के चुनाव में दिग्विजयसिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो।

शिवनारायण मीना ने उनके लिए सीट खाली की। दिग्विजय सिंह ने चाचौड़ा से विधायक का उपचुनाव जीता। लेकिन 2013 के विधानसभा चुनावी में बीजेपी की ममता मीना ने मंत्री रहे चार बार के विधायक शिवनारायण मीना को पराजित किया।  इस चुनाव में बीजेपी को 82 हजार 779 वोट मिले। जबकि कांग्रेस को 47 हजार 878 वोट मिले। इस तरह जीत का अंतर। 34 हजार 901वोटों का रहा। अब जब चुनाव नजदीक है तो चाचौड़ा में एक बार फिर सियासी पारा चढ़ने लगा है।

चांचौड़ा विधानसभा के इतिहास में अब तक यहां से तीन बार ठाकुर, दो बार गुप्ता, दो बार रघुवंशी, और पांच बार मीना समाज के प्रत्याशी विधायक चुने गए हैं। दावेदारी के तौर पर कई नेताओं के नाम सामने आए। लेकिन पिछले दो चुनाव से दोनों ही दलों की पसंद मीना समाज के प्रत्याशी ही रहे हैं। इस बार फिर जातिगत समीकरण हाबी होने से दोनों प्रमुख दलों का फोकस फिलहाल बहुसंख्यक जाति पर ही बना हुआ है।

सियासी गतिविधियों की बात की जाए चाचौड़ा में टिकट के दावेदारों की होड़ शुरू हो गई है। दोनों ही दलों में एक अनार, सौ बीमार जैसी स्थिति बनी हुई है।बीजेपी में वर्तमान विधायक और तेजतर्रार ममता मीना के साथ आधा दर्जन नेता ताल ठोक रहे हैं। वहीं कांग्रेस में सबसे पहला नाम पूर्व सांसद लक्ष्मणसिंह का आगे आ रहा है। अगर वो मैदान में नहीं उतरते तो कांग्रेस में भी दावेदारों की संख्या कम नहीं हैं।

चाचौड़ा विधानसभा गुना जिले में आने वाली ये सीट कई मायनों में खास और हाईप्रोफाइल है। खास इसलिए कि यहां की सियासत पर लंबे समय से राघौगढ़ राजपरिवार और कांग्रेस का खासा दबदबा रहा है। पिछले 15 सालों से प्रदेश में सत्ताधारी बीजेपो को जीत 1990 के चुनाव के बाद 2013 के विधानसभा चुनाव में मिला।  चुनावी साल है तो चाचौड़ा में टिकट के लिए भी नेता जोड़-तोड़ में जुट गए हैं। कांग्रेस हो या बीजेपी दोनों दलों से कई दावेदार मैदान में मोर्चा संभालते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस की बात करें तो 

 चांचौड़ा में अर्से बाद राघौगढ़ राजघराना की ओर से दावेदारी सामने आ रही है। राघौगढ़ के छोटे राजा यानी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह ने सक्रियता बढ़ा दी है।  लक्ष्मणसिंह इस सीट से टिकट की खुलकर डिमांड करते हैं तो पार्टी के दूसरे नंबर के नेता खुद ही मैदान छोड़ने को तैयार हैं। लक्ष्मणसिंह की दावेदारी नहीं होने की स्थिति में पूर्व मंत्री शिवनारायण मीना यहां कांग्रेस के दावेदार हो सकते हैं। वहीं कुंभराज मंडी अध्यक्ष भगवान सिंह मीना, देवेंद्र दीतलबाड़ा और देवेंद्र पटौदी का नाम भी इस सूची में शामिल है। 

वहीं दूसरी ओर बीजेपी में सीटिंग एमएलए ममता मीना टिकट की प्रबल दावेदार हैं। उनका दावा इसलिए भी मजबूत नजर आता है क्योंकि पिछले चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के इस गढ़ में सेंध लगाई थी।  ममता मीना के बाद दूसरे दावेदार के रूप में गुना जिला पंचायत अध्यक्ष अर्चना चौहान के पति बल्लू कालापहाड़ का नाम भी सामने आ रहा है। बल्लू कालापहाड़ ने चुनाव लड़ने की तैयारी भी शुरू कर दी है। इनके अलावा आरएसएस से जुड़े बीजेपी नेता अनिरुदध सिंह मीना, राधेश्याम सोनी और प्रदीप नाठाणी भी दावेदारी कर रहे हैं।

दोनों दलों में बढ़ी दावेदारी ने चाचौड़ा विधानसभा में पार्टी हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। क्योंकि चाचौड़ा सीट दोनों दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है। एक और बीजेपी की चिंता अर्से बात अपने कब्जे में आई चाचौड़ा सीट को बचाकर रखने की है तो दूसरी कांग्रेस वापस इस गढ़ को हासिल करने के लिए बेताब नजर आ रही है। 

 

वेब डेस्क, IBC24


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