मुंबई सेंट्रल पार्क परियोजना को लेकर आदित्य ठाकरे और देवड़ा के बीच बहस

मुंबई सेंट्रल पार्क परियोजना को लेकर आदित्य ठाकरे और देवड़ा के बीच बहस

मुंबई सेंट्रल पार्क परियोजना को लेकर आदित्य ठाकरे और देवड़ा के बीच बहस
Modified Date: February 20, 2026 / 05:33 pm IST
Published Date: February 20, 2026 5:33 pm IST

मुंबई, 20 फरवरी (भाषा) महानगर की महालक्ष्मी सेंट्रल पार्क परियोजना को लेकर शुक्रवार को विवाद पैदा हो गया और शिवसेना (उबाठा) विधायक आदित्य ठाकरे ने इसका विरोध किया वहीं प्रतिद्वंद्वी शिवसेना नेता मिलिंद देवड़ा ने उनकी आलोचना का प्रतिवाद दिया।

महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री ठाकरे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि महालक्ष्मी रेसभ् कोर्स के मौजूदा खुले मैदान को कंक्रीट में बदल कर उसका निजी लाभ के लिए व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

इस परियोजना को 2024 में राज्य मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी, जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री थे। इस परियोजना में एक सेंट्रल पार्क और उसके नीचे 10 लाख वर्ग फुट का भूमिगत खेल परिसर बनाने की परिकल्पना की गई है।

ठाकरे ने कोलाबा के बैक गार्डन में प्रस्तावित ‘एस्ट्रो टर्फिंग’ का भी विरोध किया और कहा कि स्थानीय निवासियों और स्कूली बच्चों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले खेल के मैदान प्राकृतिक मिट्टी के ही रहने चाहिए और उन्हें ‘‘कंक्रीट से या कृत्रिम घास’’ से नहीं बनाया जाना चाहिए।

राज्यसभा सदस्य मिलिंद देवड़ा ने उनका प्रतिवाद करते कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य पार्क की मौजूदा 125 एकड़ भूमि और तटीय सड़क की 175 एकड़ भूमि को मिलाकर भारत का सबसे बड़ा शहरी हरित क्षेत्र बनाना है। इससे शहर के लिए 300 एकड़ का हरित क्षेत्र बनेगा।

उन्होंने कहा कि यह सतह पूरी तरह से हरी-भरी रहेगी और इसमें वनस्पति उद्यान भी होगा।

देवड़ा ने कहा कि प्रस्तावित भूमिगत खेल परिसर ऊपर की हरियाली को संरक्षित करते हुए शहर के युवाओं के लिए आधुनिक खेल अवसंरचना प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना भूजल पुनर्भरण और बाढ़ नियंत्रण के प्रावधानों के साथ विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाती है

देवड़ा ने ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके जैसे नेताओं को निजी मनोरंजन के लिए बालासाहेब ठाकरे राष्ट्रीय स्मारक जैसी जगहों तक पहुंच का विशेषाधिकार है, लेकिन मुंबई के लाखों आम लोगों के पास आसपास विशाल खुले क्षेत्र नहीं हैं।

भाषा अविनाश माधव

माधव


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