पैरोल मिलने पर अबू सलेम भाग जाएगा : महाराष्ट्र सरकार ने उच्च न्यायालय से कहा

पैरोल मिलने पर अबू सलेम भाग जाएगा : महाराष्ट्र सरकार ने उच्च न्यायालय से कहा

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  • Publish Date - January 20, 2026 / 06:02 PM IST,
    Updated On - January 20, 2026 / 06:02 PM IST

मुंबई, 20 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को गैंगस्टर अबू सलेम की पैरोल का विरोध करते हुए मुंबई उच्च न्यायालय को बताया कि 1993 के बम विस्फोटों का दोषी फरार हो सकता है, जिससे भारत और पुर्तगाल के बीच कूटनीतिक तनाव पैदा हो सकता है।

सलेम को 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पित करके भारत लाया गया था। उसने नवंबर 2025 में अपने बड़े भाई अबू हकीम अंसारी की मृत्यु के बाद, उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जाने के लिए 14 दिनों की पैरोल मांगी थी।

न्यायमूर्ति ए एस गडकरी और न्यायमूर्ति श्याम चांडक की पीठ के समक्ष दाखिल हलफनामे के अनुसार, राज्य सरकार ने कहा कि अधिकतम दो दिनों की आपातकालीन पैरोल दी जा सकती है।

कारा महानिरीक्षक सुहास वरके ने अदालत के समक्ष दाखिल हलफनामे में कहा, ‘‘यदि याचिकाकर्ता (सलेम) को पैरोल दी जाती है, तो वह फिर से भाग जाएगा, जैसा 1993 में उसने किया था।’’

हलफनामे में यह भी कहा गया कि अगर वह भाग गया तो भारत और पुर्तगाल के बीच ‘‘गंभीर समस्याएं’’ पैदा हो जाएंगी और समाज के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न होगा।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए अभियोजन एजेंसी होने के नाते प्रतिवादी के रूप में पक्षकार बनाये जाने का अनुरोध किया।

सीबीआई ने राज्य सरकार की चिंताओं से सहमति जताते हुए कहा कि सलेम का पैरोल पर जेल से बाहर आना, भले ही अस्थायी रूप से हो, उससे ‘‘कानून-व्यवस्था की समस्या’’ उत्पन्न होगी।

अदालत ने जब पूछा कि किस प्रकार की कानून-व्यवस्था संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, तो एजेंसी की ओर से उपस्थित वकील ने उचित निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा।

इसके बाद उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई 28 जनवरी के लिए स्थगित कर दी।

सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि सलेम एक अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर है, जो दशकों से आपराधिक गतिविधियों में लिप्त था।

हलफनामे में कहा गया है कि सलेम को पुर्तगाल से एक प्रत्यर्पण संधि के तहत प्रत्यर्पित किया गया था।

हलफनामे में कहा गया है कि भारत सरकार, सलेम के प्रत्यर्पण के समय पुर्तगाल सरकार को दिये गए आश्वासन का पालन करने के लिए बाध्य है।

हलफनामे के अनुसार, ‘‘यदि याचिकाकर्ता अब फरार हो जाता है, तो दोनों देशों (भारत और पुर्तगाल) के बीच गंभीर समस्याएं उत्पन्न होंगी और समाज के लिए खतरा पैदा होगा।’’

पुर्तगाल में, सलेम को फर्जी पासपोर्ट पर यात्रा करने के आरोप में दोषी करार दिया गया था। उसे पुर्तगाल के लिस्बन में गिरफ्तार किया गया और नवंबर 2005 में भारत प्रत्यर्पित किया गया।

हलफनामे के अनुसार, सलेम द्वारा जेल अधिकारियों से पैरोल का अनुरोध किये जाने के बाद, उत्तर प्रदेश पुलिस से एक रिपोर्ट मांगी गई थी, जहां वह जाना चाहता है।

हलफनामे में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत कर कहा कि आज़मगढ़ का सरायमीर इलाका, जहां सलेम जाना चाहता है, सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इलाके में सलेम की मौजूदगी से कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा होगी।

हलफनामे में कहा गया कि इसलिये सलेम की 14 दिन की पैरोल की अर्जी खारिज कर दी गई।

इसमें कहा गया है कि सलेम को दो दिन की पैरोल दी जा सकती है और यात्रा का समय उसकी सजा में गिना जाएगा।

हलफनामे में दावा किया गया है कि 1993 में सलेम गिरफ्तारी से बचने के लिए भारत से भाग गया था।

उसे 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों के मामले सहित तीन मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है और कई अन्य मामलों में 25 साल जेल की सजा सुनाई गई है।

सलेम ने पिछले महीने दायर अपनी याचिका में पैरोल की मांग की थी, क्योंकि उसके बड़े भाई अबू हकीम अंसारी का नवंबर 2025 में निधन हो गया था। उसने कहा था कि अदालत की क्रिसमस की छुट्टियों के कारण याचिका दायर करने में देरी हुई।

सलेम की याचिका के अनुसार, उसने 15 नवंबर को ही अपने दिवंगत भाई के अंतिम संस्कार और संबंधित रस्मों में शामिल होने के लिए जेल अधिकारियों से 14 दिन की आपातकालीन पैरोल हासिल करने के लिए आवेदन किया था।

हालांकि, जेल अधिकारियों ने 20 नवंबर 2025 को एक आदेश के माध्यम से उसकी अर्जी खारिज कर दी।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप