पटना, सात मार्च (भाषा) बिहार में जनता दल (यू) के विधायक हरिनारायण सिंह ने शनिवार को दावा किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद राज्य में बनने वाली नयी सरकार में पार्टी प्रमुख के बेटे निशांत को उपमुख्यमंत्री बनाने का ‘‘सर्वसम्मति’’ से निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले एवं नालंदा जिले के हरनौत से विधायक सिंह ने यह भी दावा किया कि निशांत अगले महीने राज्य विधान परिषद के लिए निर्वाचित होंगे।
जद (यू) अध्यक्ष नीतीश कुमार द्वारा मुख्यमंत्री पद छोड़ने और राज्यसभा जाने के अपने निर्णय के बारे में अपने सहयोगियों को जानकारी देने के एक दिन बाद सिंह ने यहां एक निजी समाचार चैनल को बताया, ‘‘कल मुख्यमंत्री के आवास पर हुई विधायक दल की बैठक में, नयी सरकार में निशांत को उपमुख्यमंत्री बनाने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।’’
जद (यू) विधायक सिंह ने कहा, ‘‘यह भी निर्णय लिया गया कि निशांत औपचारिक रूप से जद (यू) में शामिल होंगे। चूंकि एक संवैधानिक पद संभालने के लिए उन्हें विधानमंडल का सदस्य बनना आवश्यक है, इसलिए अप्रैल में नौ सीट के लिए होने वाले द्विवार्षिक चुनाव में वह विधान परिषद के लिए निर्वाचित होंगे। जरूरी नहीं है कि वह अपने पिता के इस्तीफे के बाद खाली होने वाली सीट से चुनाव लड़ें।’’
सिंह ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘यह स्पष्ट नहीं है कि निशांत नयी सरकार बनने के तुरंत बाद उपमुख्यमंत्री बनेंगे या कुछ समय बाद। यह फैसला शीर्ष नेतृत्व द्वारा उचित समय पर लिया जाएगा। मैं इन अटकलों के बारे में कुछ नहीं कह सकता कि जद(यू) दो उपमुख्यमंत्री बनाये जाने पर जोर देगी। कल केवल निशांत के बारे में ही फैसला लिया गया।’’
जद(यू) कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने इसकी पुष्टि की कि निशांत को औपचारिक रूप से रविवार को पार्टी में शामिल किया जाएगा, लेकिन उन्होंने इस संबंध में और कोई जानकारी नहीं दी।
नीतीश कुमार के बेटे निशांत के नेताओं से बातचीत करने के लिए झा के आवास पर आने के कुछ घंटे बाद झा ने पत्रकारों से कहा, ‘‘निशांत कल जद(यू) में शामिल होंगे, हालांकि मुझे लगता है कि ‘शामिल होना’ सही शब्द नहीं है, क्योंकि वह हमेशा से पार्टी में रहे हैं। बेहतर होगा कि यह कहा जाए कि वह कल से पार्टी में सक्रिय रूप से काम करना शुरू करेंगे।’’
जद(यू) और नयी सरकार में निशांत की भूमिका पर सवाल का जवाब देने से बचते हुए झा ने कहा, ‘‘पार्टी द्वारा उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, उसे निभाने के लिए वह तैयार हैं… नयी सरकार नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में काम करेगी। उन्होंने स्वयं ऐसा कहा है। संसद सत्र के दौरान को छोड़कर, वह (कुमार) पूरे समय बिहार में ही रहेंगे।’’
निशांत का राजनीति में प्रवेश का निर्णय उनके पिता के पद छोड़ने के निर्णय के कुछ दिनों बाद हुआ है। नीतीश कुमार ‘वंशवादी राजनीति’ के मुखर आलोचक के रूप में जाने जाते हैं और जिन्होंने लगातार पांचवें कार्यकाल के लिए शपथ लेने के चार महीने से भी कम समय के भीतर पद छोड़ने का फैसला किया।
ऐसी अटकलें हैं कि मुख्यमंत्री का पद अब बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को मिलेगा और जद(यू) गृह मंत्रालय के महत्वपूर्ण प्रभार के साथ दो उपमुख्यमंत्री बनाये जाने पर जोर दे सकती है, जो वर्तमान व्यवस्था का पूर्ण उलट होगा।
दो उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा भाजपा से हैं, जबकि गृह मंत्रालय का प्रभार चौधरी के पास है।
इस बीच, विपक्ष ने आरोप लगाया कि कुमार को भाजपा द्वारा ‘बिहार से बाहर निकाला जा रहा है’ और उन्हें ‘‘सम्मानजनक विदाई से भी वंचित किया जा रहा है।’’
पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता राबड़ी देवी ने पत्रकारों से कहा, ‘‘नीतीश कुमार पद अपनी मर्जी से नहीं छोड़ रहे हैं। भाजपा उन्हें बिहार से बाहर निकाल रही है, लेकिन उन्हें दबाव में झुकने से इनकार करते हुए इसका विरोध करना चाहिए।’’
कुमार ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले अपने ही दल के अधिकांश सहयोगियों को चौंकाते हुए, सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि वह उच्च सदन में प्रवेश करना चाहते हैं, क्योंकि ‘‘राज्य विधानमंडल और संसद के दोनों सदनों का अनुभव प्राप्त करना हमेशा से मेरी इच्छा रही है।’’
बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे कुमार अपने पूरे कार्यकाल में विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) रहे हैं, इससे पहले बाढ़ और नालंदा लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
इस बीच, बिहार प्रदेश कांग्रेस मीडिया प्रकोष्ठ के प्रमुख राजेश राठौर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से ‘‘अपनी निष्ठुरता छोड़ने और अपने पुराने सहयोगी नीतीश कुमार को सम्मानजनक विदाई का मौका देने’’ का आग्रह किया।
राठौर ने एक बयान में कहा, ‘‘अब जबकि नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया है, अमित शाह कम से कम इतना तो कर ही सकते हैं कि भाजपा के एक उम्मीदवार को वापस कर लें और बाकी पांच उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित होने दें। नीतीश कुमार ने अपने लंबे कार्यकाल में इस परंपरा का सम्मान किया है।’’
राज्य में राज्यसभा की पांच सीट के लिए द्विवार्षिक चुनाव में कुल छह उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें कांग्रेस की सहयोगी राजद का एक उम्मीदवार भी शामिल है। राठौर के अनुसार, ‘‘नीतीश कुमार ने 2005 में सत्ता संभालने के बाद से अधिकतर मौकों पर यह सुनिश्चित किया है कि राज्यसभा चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हों।’’
भाषा अमित सुरेश
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