गोला-बारूद निर्माण इकाइयों में दुर्घटनाओं का कारण मानकों का ठीक से पालन न होना: सचिव

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गोला-बारूद निर्माण इकाइयों में दुर्घटनाओं का कारण मानकों का ठीक से पालन न होना: सचिव

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  • Publish Date - July 31, 2026 / 04:21 PM IST,
    Updated On - July 31, 2026 / 04:21 PM IST

पुणे, 31 जुलाई (भाषा) रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले रक्षा उत्पादन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि विस्फोटक सामग्री और गोला-बारूद बनाने वाले क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी खामियों की मुख्य वजह नियमों का अभाव नहीं, बल्कि मौजूदा मानकों का लचर क्रियान्वयन है। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं को सिर्फ कम करने के बजाय उन्हें पूरी तरह से ‘‘खत्म’’ किया जाना चाहिए।

रक्षा उत्पादन विभाग के सचिव संजीव कुमार ने विस्फोटक पदार्थ और गोला-बारूद बनाने वाली इकाइयों में सुरक्षा नियमों का पालन बेहतर करने और मानवीय निगरानी पर निर्भरता घटाने के लिए प्रौद्योगिकी का अधिक इस्तेमाल करने पर जोर दिया।

पुणे में ‘सैन्य विस्फोटक सामग्री – सुरक्षा, अनुपालन और गुणवत्ता आश्वासन, रक्षा उत्पादन’ पर आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने हाल के वर्षों में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों और निजी उद्योगों में हुई कई दुर्घटनाओं के बाद इस कार्यक्रम को आयोजित करने का फैसला किया।

उन्होंने कहा, ‘‘इन हादसों के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे कि समस्या शायद सही मानकों की कमी नहीं, बल्कि उन मानकों को समझदारी और ईमानदारी से लागू न करना है। जब लोग कई वर्षों तक काम करते हैं, तो वे अक्सर लापरवाह हो जाते हैं और प्रक्रियाओं को हल्के में लेने लगते हैं।’’

भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी ने कहा कि ऐसी दुर्घटनाओं की जांच के लिए बनाई गई एक समिति ने पाया कि सुरक्षा मानक और उपाय पहले से ही मौजूद हैं, लेकिन उन्हें लागू करने में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विस्फोटक सामग्री से जुड़ी दुर्घटनाओं से अपूरणीय जनहानि होती है, इसलिए इन्हें हर हाल में रोका जाना चाहिए।

रक्षा उत्पादन सचिव ने सुझाव दिया कि विस्फोटक सामग्री और गोला-बारूद बनाने वाली इकाइयों में सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन बेहतर करने और मानवीय निगरानी पर निर्भरता घटाने के लिए प्रौद्योगिकी — जैसे सेंसर, सीसीटीवी कैमरे, ‘ऑटोमेटेड मॉनिटरिंग सिस्टम’ और ‘डेटा एनालिटिक्स’ — अधिक इस्तेमाल किया जाए।

आईएएस अधिकारी ने उद्योग जगत से केवल गोला-बारूद के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय प्रणोदक (प्रोपेलेंट) जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल के उत्पादन में निवेश करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, ‘‘देश में प्रोपेलेंट की कमी है। हम केवल मौजूदा निर्माताओं से इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन देश में प्रोपेलेंट उत्पादन क्षमता विकसित करने के लिए पर्याप्त निवेश नहीं कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘रक्षा उत्पादन विभाग में पहले 19 हितधारकों के साथ बातचीत होती थी। पिछले महीने हमने इनकी संख्या घटाकर सिर्फ तीन कर दी, जिससे मंज़ूरी मिलने में लगने वाला समय तीन से छह माह से घटकर एक महीने से भी कम हो जाएगा।’’

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश