अभिनय के क्षेत्र में संयोगवश प्रवेश किया: अभिनेता-निर्देशक महेश मांजरेकर

अभिनय के क्षेत्र में संयोगवश प्रवेश किया: अभिनेता-निर्देशक महेश मांजरेकर

अभिनय के क्षेत्र में संयोगवश प्रवेश किया: अभिनेता-निर्देशक महेश मांजरेकर
Modified Date: March 1, 2026 / 09:25 pm IST
Published Date: March 1, 2026 9:25 pm IST

(कोमल पंचमाटिया)

मुंबई, एक मार्च (भाषा) अभिनेता-फिल्म निर्माता महेश मांजरेकर कहते हैं कि उन्होंने कभी अभिनय को अपना करियर बनाने की योजना नहीं बनाई थी, लेकिन रंगमंच से जुड़ने के बाद उनका जुनून इतना गहरा हो गया कि वे अब मंच या फिल्म में किसी भी दमदार भूमिका को ठुकराते नहीं हैं।

मांजरेकर ने बताया कि उनके करियर की शुरुआत 1975 में एकांकी नाटकों से हुई थी।

उन्होंने बताया कि उनके पड़ोसी, लोकप्रिय रंगमंच कलाकार जयदेव हट्टंगडी द्वारा आयोजित अभिनय कार्यशालाओं में भाग लेने के बाद उनकी रुचि और भी बढ़ गई।

मांजरेकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में बताया, “मैं संयोगवश अभिनय के क्षेत्र में आ गया, मैंने कभी इसे पेशे के रूप में नहीं सोचा था। जिस हाउसिंग सोसाइटी में मैं रहता था, वहां हर साल कार्यक्रम होते थे और हम सभी नाटकों में अभिनय करते थे। रोहिणी हट्टंगड़ी और जयदेव हट्टंगड़ी मेरे पड़ोसी थे।”

उन्होंने कहा, “जब जयदेव एनएसडी से लौटे, तो ओमपुरी और नसीरुद्दीन शाह जैसे कई लोग अक्सर उनके घर आने लगे। वे जयदेव के साथ मिलकर नाटक से पहले अभिनय कार्यशाला आयोजित करते थे। मुझे यह रोचक लगा और मैंने जयदेव की कार्यशाला में भाग लेने के बारे में सोचा। इस तरह रंगमंच के प्रति मेरा प्रेम जागा।”

मांजरेकर ने 1984 में सचिन खेडेकर और सुनील बर्वे के साथ नाटक “अफलातून” से अभिनय की व्यावसायिक दुनिया में पदार्पण किया।

उन्होंने कहा, “डॉ. श्रीराम लागू जैसे महान अभिनेता थे और कई अन्य भी थे, इसलिए हमारे लिए व्यावसायिक रंगमंच में जगह बनाना थोड़ा मुश्किल था।”

उन्होंने बताया कि बाद में उन्होंने 1988 में अपना खुद का रंगमंच समूह, ‘अश्वमी रंगमंच समूह’ शुरू किया और “डॉ. तुम्हिसुद्धा”, “ध्यानिमानी” और “ऑल द बेस्ट” जैसे प्रशंसित नाटक प्रस्तुत किए।

वर्ष 1992 में, मांजरेकर ने मराठी फिल्म “जीवा सखा” और टीवी शो “क्षितिज ये नहीं” में अभिनय किया।

चार साल बाद, उन्होंने अभिनय छोड़कर निर्देशन पर ध्यान केंद्रित किया और संजय दत्त अभिनीत बेहतरीन फिल्म “वास्तव: द रियलिटी” (1999) से निर्देशन की शुरुआत की।

उन्होंने कहा, “मैंने 1996 तक थिएटर किया, लेकिन फिर निर्देशन में रुचि होने के कारण अभिनय पीछे छूट गया। मैंने ‘वास्तव’ से निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं दोबारा अभिनय करूंगा, लेकिन फिर ‘कांटे’ ने मुझे अभिनय में वापस ला दिया, इसलिए जब भी कुछ दिलचस्प होता है, मैं उसे कर लेता हूं।

भाषा राखी सुरेश

सुरेश


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