विखे पाटिल से मुलाकात के बाद जरांगे ने शनिवार से आंदोलन शुरू करने की बात कही

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विखे पाटिल से मुलाकात के बाद जरांगे ने शनिवार से आंदोलन शुरू करने की बात कही

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  • Publish Date - May 29, 2026 / 10:40 PM IST,
    Updated On - May 29, 2026 / 10:40 PM IST

जालना, 29 मई (भाषा) मराठा आरक्षण मुद्दे पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने से एक दिन पहले कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने शुक्रवार को देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार पर मराठा समुदाय के साथ भेदभाव करने और उसे ‘कठोर अग्निपरीक्षा’ से गुजरने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया।

उन्होंने यह भी कहा कि वह शनिवार सुबह दस बजे से आंदोलन शुरू करने पर अडिग हैं, जिसे उन्होंने ‘अब तक का सबसे कठिन’ और ‘अभूतपूर्व’ आंदोलन करार दिया।

जरांगे ने कहा ‘हम अब केवल सरकार के सकारात्मक कथनों पर भरोसा नहीं कर सकते। जब तक हमारी प्रत्येक मांग को लिखित में स्वीकार नहीं कर लिया जाता, हम पीछे नहीं हटेंगे। हम सरकार को और समय देने के लिए तैयार नहीं हैं।’

जरांगे ने जालना के अंतरवाली सराटी में राज्य मंत्री और मराठा समुदाय के लिए गठित उप-समिति के अध्यक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल से मुलाकात की और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए गठित मंत्रालय की तर्ज पर मराठा समुदाय के लिए एक मंत्रालय के गठन की मांग की।

जहां विखे पाटिल ने मराठा समुदाय के लोगों को ओबीसी आरक्षण का लाभ उठाने की अनुमति देने के लिए कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को सूचीबद्ध किया, वहीं जरांगे ने आरोप लगाया कि अभिलेखागार और राजपत्रों से मराठा समुदाय के रिकॉर्ड खोजने के लिए गठित शिंदे समिति के पास कोई कर्मचारी नहीं है।

जरांगे ने दावा किया कि फारसी, उर्दू और मोडी भाषा के दस्तावेजों को पढ़ने के लिए नियुक्त किए गए लोगों को वेतन नहीं दिया गया, इसलिए उन्होंने एक महीने बाद अपनी नौकरी छोड़ दी।

विखे पाटिल ने कहा कि कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने के लिए एक मानक प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर ली गई है और इसकी एक प्रति जरांगे को दी जाएगी। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार इस प्रक्रिया में होने वाली देरी को दूर करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, “सरकार ने प्रमाण पत्र वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाने के प्रयास किए हैं, लेकिन इसमें और तेजी लाई जा सकती है। मैं अगले सप्ताह मुख्यमंत्री से मिलूंगा और उन मुद्दों पर चर्चा करूंगा जिनमें तेजी लाने की जरूरत है।”

उन्होंने कहा कि शिंदे समिति के गठन के बाद से महाराष्ट्र में लगभग 58 लाख कुनबी अभिलेखों का पता लगाया गया है और उन अभिलेखों के आधार पर 12 लाख से अधिक जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।

विखे पाटिल ने कहा, ‘मराठवाड़ा में कुनबी प्रमाणपत्रों के लिए 3,08,898 लोगों के आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 3,00,251 आवेदकों को प्रमाणपत्र जारी किए गए, जबकि 427 आवेदन अस्वीकृत कर दिए गए। शिंदे समिति के गठन के बाद से मराठवाड़ा में 61,230 प्रमाणपत्र वितरित किए जा चुके हैं।’

उन्होंने कहा कि कुछ जिलों, विशेषकर धराशिव, परभणी और हिंगोली में प्रगति धीमी रही है, जबकि बीड में प्रमाण पत्र वितरण की संख्या सबसे अधिक रही है।

विखे पाटिल ने आश्वासन दिया कि प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में मौजूद कुछ ‘कमियों’ को दूर कर लिया जाएगा।

जरांगे ने घोषणा की है कि वह मराठा समुदाय की ‘‘अधूरी’’ मांगों को लेकर 30 मई से महाराष्ट्र में जालना जिले के अंतरवाली सराटी में अनशन शुरू करेंगे। यह स्थान मुंबई से करीब 400 किलोमीटर दूर है। उन्होंने चिलचिलाती धूप में बिना किसी आश्रय के भूख हड़ताल करने का फैसला किया है।

जरांगे मांग कर रहे हैं कि सभी मराठाओं को कुनबी माना जाए। कुनबी कृषक जाति है, जो ओबीसी श्रेणी में शामिल है। मराठाओं को कुनबी माने जाने पर मराठा समुदाय के लोग सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के पात्र हो जाएंगे। हालांकि, ओबीसी वर्गों को डर है कि मराठाओं को इस श्रेणी में शामिल करने से उनके आरक्षण पर असर पड़ेगा।

जरांगे ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा कि पिछले अनशनों से उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ा है लेकिन वह अपना आंदोलन जारी रखने को लेकर दृढ़ हैं।

जरांगे ने कहा, ‘मुझे उपवास पसंद नहीं है, लेकिन सत्ता में बैठे लोग मराठा समुदाय की क्रूर अग्निपरीक्षा ले रहे हैं। आंदोलन को दबाने और अहंकार दिखाने की भाषा अब बंद होनी चाहिए। अगर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस में हिम्मत है तो उन्हें मेरी तरह मई की इस चिलचिलाती गर्मी में कम से कम दो दिन बैठना चाहिए।’

जरांगे ने आरोप लगाया कि सरकार ने पिछले 10 महीनों से मराठा आरक्षण से संबंधित निर्णयों में केवल देरी की है और कोई ठोस राहत प्रदान नहीं की है।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘मराठा छात्रों को न तो प्रमाण पत्र मिल रहे हैं और न ही उनकी वैधता की मंजूरी। सैकड़ों छात्र पीड़ित हैं और उनका शैक्षणिक करियर बर्बाद हो रहा है।’

अपने पिछले मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दायर मामलों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार के साथ एक समझौता हुआ था जिसके तहत सरकार ने 1,500 मामलों में से लगभग 800 मामले वापस लेने का फैसला किया था।

उन्होंने कहा, ‘अब सरकार का दावा है कि केवल 64 मामले बचे हैं। हम इस मुद्दे पर आमने-सामने चर्चा के लिए तैयार हैं।’

उन्होंने मुख्यमंत्री के छत्रपति संभाजीनगर दौरे के दौरान विरोध स्वरूप काले झंडे लहराने वाले मराठा समुदाय के युवाओं को हिरासत में लेने के लिए पुलिस की आलोचना की।

उन्होंने कहा, ‘युवा गुस्से में हैं। सरकार को स्थिति को उग्र आंदोलन में तब्दील नहीं होने देना चाहिए।’

जरांगे ने मुख्यमंत्री फडणवीस पर भाजपा और उसके सहयोगी दलों के कई नेताओं को राजनीतिक रूप से दरकिनार करने का भी आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि महायुति सरकार मराठों के भारी संख्या में मतदान के कारण सत्ता में आई, लेकिन समुदाय भेदभाव और अन्याय का सामना कर रहा है।

इसी बीच, राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के अध्यक्ष बबनराव तायवाडे ने चेतावनी दी कि अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को प्रभावित करने वाला कोई भी कदम राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शनों को जन्म देगा।

तायवाडे ने संवाददाताओं से कहा कि ओबीसी समुदाय ‘‘देखो और इंतजार करो’’ की स्थिति में है।

भाषा

शुभम पवनेश

पवनेश