अजित पवार विमान हादसाः वो अंतिम 26 मिनट…

Ads

अजित पवार विमान हादसाः वो अंतिम 26 मिनट...

  •  
  • Publish Date - January 28, 2026 / 06:50 PM IST,
    Updated On - January 28, 2026 / 06:50 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

मुंबई, 28 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को ले जा रहे विमान को बुधवार सुबह खराब दृश्यता के बाद हवा में एक चक्कर लगाने के बाद एटीसी से उतरने की अनुमति मिल गई थी। लेकिन अंतिम तौर पर मिली अनुमति के बाद विमान ने एटीसी को कोई ‘रीड-बैक’ या प्रतिक्रिया नहीं दी और कुछ ही क्षण बाद रनवे किनारे पर वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

नागर विमानन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने पहले कहा था कि विमान खराब दृश्यता के बीच उतरने की कोशिश कर रहा था।

नागर विमानन मंत्रालय द्वारा जारी किये गये एक बयान में ‘वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के दुर्भाग्यपूर्ण ‘लेयरजेट 45’ विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के अंतिम मिनटों का ब्योरा दिया गया है। इस दुर्घटना में पवार समेत विमान में सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई।

बारामती में एक ‘अनियंत्रित हवाई क्षेत्र’ है। ‘अनियंत्रित हवाई क्षेत्र’ का सामान्य अर्थ ऐसी जगह है, जहां कम दृश्यता में संचालन के दौरान विमान को निर्देश देने के लिए एक उचित ‘इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम’ का अभाव हो।

इस स्थिति में बारामती में यातायात संबंधी जानकारी बारामती के उड़ान प्रशिक्षण संगठनों के प्रशिक्षकों/पायलटों द्वारा प्रदान की जाती है।

बारामती विमान यातायात नियंत्रण कक्ष (एटीसी) के अनुसार, विमान से पहली बार सुबह आठ बजकर 18 मिनट पर संपर्क हुआ।

इसके बाद, जब विमान बारामती से 30 नॉटिकल मील दूर था तब उसने संपर्क किया। पायलट को अपने विवेक से ‘दृश्य मौसम संबंधी स्थितियों’ में नीचे उतरने की सलाह दी गई।

चालक दल ने हवाओं और दृश्यता के बारे में पूछा। तब उसे बताया गया कि हवाएं शांत हैं और दृश्यता लगभग 3,000 मीटर है।

नागर विमानन मंत्रालय के बयान में कहा गया है,‘‘इसके बाद विमान ने आखिरी तौर पर रनवे 11 के करीब आने की सूचना दी, लेकिन कहा कि रनवे उसे दिखाई नहीं दे रहा है। उसने पहले प्रयास में हवा में चक्कर लगाना शुरू किया।’’

चक्कर लगाने के बाद, चालक दल से फिर पूछा गया कि क्या उन्हें रनवे दिखाई दे रहा है।

जवाब था: ‘‘ फिलहाल रनवे नजर नहीं आ रहा है। जब रनवे नजर आयेगा, हम संपर्क करेंगे।’’

कुछ सेकंड बाद, चालक दल ने बताया कि उसे रनवे दिखाई दे रहा है।

बयान में कहा गया है, ‘‘विमान को सुबह आठ बजकर 43 मिनट पर रनवे 11 पर उतरने की अनुमति दी गई। हालांकि, उसने (चालक दल ने) लैंडिंग की अनुमति के बारे में कोई उत्तर नहीं दिया (एटीसी को जवाब नहीं दिया)। इसके बाद, सुबह आठ बजकर 44 मिनट पर एटीसी ने रनवे 11 के किनारे के आसपास आग की लपटें देखीं।’’

आपातकालीन सेवाएं तुरंत दुर्घटनास्थल पर पहुंचीं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

विमानन के क्षेत्र में, ‘चक्कर लगाना (गो-अराउंड)’ एक मानक प्रक्रिया है जिसमें पायलट पहली बार में विमान उतारने का प्रयास रोक देता है और विमान उतारने की अगली कोशिश के तहत उसे ऊपर ले जाता है। इसका उपयोग तब किया जाता है जब खराब मौसम, रनवे पर अस्थिर ‘लैंडिंग’ स्थिति या यातायात जैसे कारणों से सुरक्षित ‘लैंडिंग’ संभव न हो।

‘रीडबैक’ एक महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रक्रिया है जिसमें पायलट विमान यातायात नियंत्रण कक्ष से प्राप्त संदेश या निर्देश के आवश्यक हिस्सों को दोहराता है। यह एक ‘क्लोज्ड-लूप’ संवाद प्रणाली के रूप में कार्य करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि नियंत्रक के निर्देश उड़ान (चालक) दल द्वारा सही ढंग से सुने और समझे गए हैं।

विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने इस हादसे की जांच अपने हाथ में ले ली है। बयान में कहा गया है कि एएआईबी महानिदेशक जांच के लिए दुर्घटनास्थल पर जा रहे हैं।

विमान परिवहन कंपनी एक गैर-नियतकालिक ऑपरेटर (एनएसओपी) थी, जिसके पास अनुमति संख्या 07/2014 थी। प्रारंभिक एओपी (हवाई अड्डा संचालन योजना) 21 अप्रैल 2014 को जारी की गई थी। एओपी का अंतिम नवीनीकरण तीन अप्रैल 2023 को किया गया था और यह 20 अप्रैल 2028 तक वैध है।

‘वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के बेड़े में सात ‘लेयरजेट 45’ विमान (दुर्घटना में शामिल विमान सहित), पांच एम्ब्रेयर 135बीजे विमान, चार किंग एयर बी200 विमान और एक पिलाटस पीसी-12 विमान हैं।

बयान में कहा गया है कि पवार को ले जा रहे विमान का आखिरी नियामक ऑडिट डीजीसीए ने फरवरी 2025 में किया था और ‘कोई प्रथम स्तरीय निष्कर्ष जारी नहीं किया गया था।

इस विमान का निर्माण 2010 में हुआ था। विमान का उड़ान योग्य प्रमाण पत्र (सी ऑफ ए) 16 दिसंबर 2021 को जारी किया गया था। पंजीकरण का प्रमाण पत्र (सी ऑफ आर) 27 दिसंबर 2022 को जारी किया गया था। विमान का उड़ान योग्य समीक्षा प्रमाण पत्र (एआरसी) 10 सितंबर 2025 को जारी किया गया था और यह 14 सितंबर 2026 तक वैध था।

भाषा राजकुमार पवनेश

पवनेश