आंध्र पुलिस ने महिला और बाल सुरक्षा के लिए ‘शक्ति सुरक्षा वॉर रूम’ स्थापित करने की योजना बनाई

आंध्र पुलिस ने महिला और बाल सुरक्षा के लिए ‘शक्ति सुरक्षा वॉर रूम’ स्थापित करने की योजना बनाई

आंध्र पुलिस ने महिला और बाल सुरक्षा के लिए ‘शक्ति सुरक्षा वॉर रूम’ स्थापित करने की योजना बनाई
Modified Date: May 29, 2026 / 09:36 pm IST
Published Date: May 29, 2026 9:36 pm IST

अमरावती, 29 मई (भाषा) आंध्र प्रदेश पुलिस ने ‘शक्ति सुरक्षा वॉर रूम’ की प्रस्तावित स्थापना, निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर जागरूकता कार्यक्रमों और तकनीक-आधारित निगरानी प्रणालियों को मजबूत करके महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा बढ़ाने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

सूत्रों ने बताया कि यह पहल मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) हरीश कुमार गुप्ता के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो प्रौद्योगिकी, जागरूकता, सामुदायिक भागीदारी, पीड़ित सहायता और दोषसिद्धि-आधारित पुलिसिंग को संयोजित करने वाली एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

सूत्रों ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘महिलाओं की गरिमा की रक्षा करना हर किसी की जिम्मेदारी है। महिलाओं की सुरक्षा और बाल संरक्षण के लिए परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों, समुदायों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।’’

पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित ‘शक्ति सुरक्षा वॉर रूम’ में सीसीटीवी निगरानी, ​​ड्रोन निगरानी, ​​जीपीएस-आधारित गश्त, साइबर निगरानी, ​​सोशल मीडिया विश्लेषण और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों को एकीकृत किया जाएगा, ताकि राज्य भर में महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जा सके।

राज्य पुलिस विभाग ने संकट में फंसी महिलाओं और बच्चों को त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए डायल-112, चाइल्डलाइन 1098 और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 सहित आपातकालीन सेवाओं के बीच समन्वय को भी मजबूत किया है।

‘शक्ति’ पहल के तहत निर्वाचन क्षेत्रवार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि महिलाओं, छात्रों, अभिभावकों और समुदाय के सदस्यों को बाल संरक्षण, साइबर सुरक्षा, आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र तथा उपलब्ध सहायता प्रणालियों के बारे में जागरूक किया जा सके।

उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को रोकने में जागरूकता सबसे प्रभावी औजारों में से एक है। उन्होंने बताया कि जिला पुलिस महिला पुलिस कर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं, छात्रों, शिक्षकों और महिला संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चला रही है।

पुलिस सूत्रों ने माता-पिता को बच्चों द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल, ऑनलाइन बातचीत और मोबाइल फोन की गतिविधियों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी

सूत्रों ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के दीर्घकालिक प्रयासों के हिस्से के रूप में, लड़कों को पारिवारिक स्तर पर ही महिलाओं का सम्मान करना सिखाने के महत्व पर भी जोर दिया।

नेल्लोर जिला पुलिस ने राज्य के व्यापक सुरक्षा ढांचे के तहत महिलाओं की सुरक्षा, बाल संरक्षण, साइबर जागरूकता और सामुदायिक पुलिसिंग से संबंधित कई पहल की हैं।

जिले के सभी पुलिस उपमंडलों में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की निरंतर निगरानी और रोकथाम के लिए विशेष ‘शक्ति टीम’ और ‘शक्ति योद्धा क्लब’ स्थापित किए गए हैं।

जिला पुलिस ‘ऑपरेशन चिन्नारी थल्ली’ नामक एक जागरूकता पहल भी चला रही है, जिसका उद्देश्य सतत सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों के माध्यम से बाल संरक्षण, माता-पिता की जिम्मेदारी और महिलाओं की सुरक्षा को बढ़ावा देना है।

‘ऑपरेशन चिन्नारी थल्ली’ के अंतर्गत, ‘गुड टच-बैड टच’, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, साइबर अपराध से बचाव, पारिवारिक जिम्मेदारी और बाल सुरक्षा के बारे में जागरूकता पैदा की जा रही है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब तक 3,830 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जबकि 3,348 स्कूलों और कॉलेज में आत्मरक्षा प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

पुलिस ने 5,572 शक्ति योद्धा टीम भी गठित की हैं, 118 संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर उनकी निगरानी की है, 215 बालिका छात्रावासों में सुरक्षा निरीक्षण किए हैं और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत पीड़ितों को परामर्श और कानूनी सहायता प्रदान की है।

सूत्रों के अनुसार, नेल्लोर जिला शक्ति ऐप इंस्टॉल करने के मामले में आंध्र प्रदेश के शीर्ष तीन जिलों में शुमार है, जो प्रौद्योगिकी-आधारित सुरक्षा पहलों में बढ़ती सार्वजनिक भागीदारी को दर्शाता है।

इसी बीच, आंध्र प्रदेश पुलिस विभाग ने डीजीपी हरीश कुमार गुप्ता के निर्देशानुसार महिलाओं के खिलाफ अपराधों में त्वरित जांच, अभियोजन और सजा सुनिश्चित करने के लिए ‘ऑपरेशन दंडयाना’ शुरू किया है।

भाषा तान्या दिलीप

दिलीप


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