चिकित्सकों से मारपीट का मामला: उच्च न्यायालय ने दी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को जमानत

चिकित्सकों से मारपीट का मामला: उच्च न्यायालय ने दी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को जमानत

चिकित्सकों से मारपीट का मामला: उच्च न्यायालय ने दी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को जमानत
Modified Date: August 7, 2026 / 01:03 pm IST
Published Date: August 7, 2026 1:03 pm IST

मुंबई, सात अगस्त (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने ठाणे जिले में नगर निकाय द्वारा संचालित अस्पताल में चिकित्सकों के साथ मारपीट करने के आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को शुक्रवार को जमानत दे दी और मामले की त्वरित सुनवाई कर इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने का आदेश दिया।

उच्च न्यायालय ने इस कथित मारपीट मामले के चार अन्य आरोपियों को भी जमानत दे दी।

कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने म्हात्रे और अन्य आरोपियों पर कड़ी शर्तें लगाईं और उन्हें मामले में आरोप पत्र दाखिल होने तक महाराष्ट्र से बाहर रहने का आदेश दिया।

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि एक निर्वाचित पार्षद को ‘‘जनता के लिए और जनता द्वारा चुना’’ माना जाता है।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘यदि ऐसा कोई निर्वाचित व्यक्ति अपने ही मतदाताओं के साथ मारपीट करता है, तो यह लोकतंत्र के ढांचे पर हमला है।’’

अदालत ने कहा, ‘‘हालांकि, इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि जांच तेज की जा रही है। (चूंकि) आरोपी अब कुछ समय जेल में बिता चुके हैं, हमें लगता है कि जमानत दी जा सकती है।’’

अदालत ने सभी आरोपियों को मामले में आरोपपत्र दाखिल होने तक महाराष्ट्र से बाहर रहने का आदेश दिया।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘आरोपियों को महाराष्ट्र लौटने की अनुमति तभी दी जाएगी जब अधीनस्थ अदालत मामले में अभियोग तय करेगी। इसके बाद भी, वे मामले के गवाहों से संपर्क नहीं कर पाएंगे और न ही किसी सबूत के साथ छेड़छाड़ कर सकेंगे।’’

पीठ ने महाराष्ट्र सरकार को दस दिन के भीतर मुकदमे के लिए एक विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा कि पुलिस अपनी जांच पूरी करने और 12 कार्य दिवसों के भीतर राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाल से रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद उसके पांच दिन के भीतर आरोपपत्र दाखिल करना होगा।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘अधीनस्थ अदालत को आरोपपत्र दाखिल होने के एक सप्ताह के भीतर आरोपियों के खिलाफ अभियोग तय करना होगा। एक बार सुनवाई शुरू होने के बाद, अभियोजन और बचाव पक्ष अनुचित और मामूली आधार पर स्थगन का अनुरोध नहीं कर सकेंगे।’’

ठाणे जिले की एक अदालत ने कल्याण-डोंबिवली महानगर पालिका(केडीएमसी) के पार्षद म्हात्रे को 15 जुलाई को जमानत दे दी थी।

हालांकि, मुंबई उच्च न्यायालय ने इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए 18 जुलाई को अधीनस्थल अदालत द्वारा म्हात्रे को दी गई जमानत पर रोक लगा दी थी और उन्हें पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने को कहा था। इसके बाद म्हात्रे ने आत्मसमर्पण कर दिया था और वह न्यायिक हिरासत में थे।

उच्च न्यायालय ने कल्याण अदालत द्वारा पारित आदेश को ‘‘गलत ’’ बताते हुए उस पर रोक लगा दी थी।

अदालत ने कहा था कि मजिस्ट्रेट अदालत ने इस मुद्दे को बहुत हल्के में लिया और म्हात्रे के आपराधिक इतिहास पर भी विचार नहीं किया।

उच्च न्यायालय ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि अतीत में म्हात्रे के खिलाफ मारपीट के 18 मामले दर्ज किए गए थे, हालांकि उनमें से 17 मामलों में उन्हें बरी कर दिया गया है।

छह जुलाई को म्हात्रे और अन्य आरोपी एक गर्भवती महिला मरीज के इलाज में कथित देरी को लेकर हुए विवाद के बाद शास्त्री नगर अस्पताल अस्पताल में एकत्र हुए थे और चिकित्सकों के साथ मारपीट की थी।

भाषा खारी माधव

माधव


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