मुंबई: BJP’s alliance with Congress-AIMIM: महाराष्ट्र में हाल ही में संपन्न नगर निकाय चुनावों के बाद भाजपा द्वारा कुछ जगहों पर विरोधी दलों के साथ बनाए गए कथित गठबंधनों ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस या एआईएमआईएम के साथ कोई भी गठबंधन पार्टी को स्वीकार नहीं है और ऐसे कदम उठाने वालों पर कार्रवाई होगी।
BJP’s alliance with Congress-AIMIM: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इन स्थानीय गठबंधनों को पार्टी नेतृत्व की मंजूरी नहीं मिली है। उन्होंने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा, “कांग्रेस या एआईएमआईएम के साथ कोई भी गठबंधन मंजूर नहीं होगा। यदि किसी स्थानीय नेता ने अपनी तरफ से ऐसा फैसला लिया है तो यह पार्टी अनुशासन के खिलाफ है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने बताया कि ऐसे गठबंधनों को खत्म करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
ठाणे जिले की अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा ने शिवसेना को सत्ता से बाहर रखते हुए कांग्रेस और अजित पवार की राकांपा के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ का गठन किया। 60 सदस्यीय परिषद के चुनाव में शिवसेना ने 27 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया था, लेकिन बहुमत से चार सीट पीछे रह गई थी।
चुनाव में भाजपा को 14, कांग्रेस को 12 और राकांपा को चार सीटें मिलीं, जबकि दो निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। एक निर्दलीय के समर्थन से गठबंधन की संख्या बढ़कर 32 हो गई, जो बहुमत के आंकड़े से अधिक है। इसके बाद भाजपा की तेजश्री करंजुले पाटिल नगर परिषद की अध्यक्ष चुनी गईं। उपाध्यक्ष का चुनाव जल्द होने वाला है।
शिवसेना ने इस गठबंधन को “अनैतिक और मौकापरस्त” करार दिया है। पार्टी विधायक डॉ. बालाजी किनीकर ने कहा कि यह कदम “गठबंधन धर्म” से विश्वासघात है और भाजपा के “कांग्रेस-मुक्त भारत” के नारे के भी खिलाफ है। शिवसेना (उबाठा) सांसद संजय राउत ने कहा कि यह घटनाक्रम दिखाता है कि भाजपा सत्ता के लिए किसी से भी हाथ मिला सकती है।
एकनाथ शिंदे के बेटे और शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने भी अप्रत्यक्ष रूप से गठबंधन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन पार्टियों के खिलाफ चुनाव लड़ा जाता है, उनसे सत्ता के लिए हाथ मिलाना ठीक नहीं है और वरिष्ठ नेताओं को इस पर ध्यान देना चाहिए। बता दें कि अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में भाजपा ने ‘अकोट विकास मंच’ के तहत सत्ता में भागीदारी की है। इस मंच में एआईएमआईएम, शिवसेना (उबाठा), शिवसेना, राकांपा, शरद पवार की राकांपा (एसपी) और प्रहार जनशक्ति पार्टी के शामिल होने की बात सामने आई है। 35 सदस्यीय परिषद में भाजपा को 11 सीटें मिली थीं।
भाजपा सांसद अनुप धोत्रे और विधायक रंधीर सावकर ने दावा किया कि एआईएमआईएम के चार पार्षदों ने पार्टी छोड़कर भाजपा समर्थित मंच का साथ दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने एआईएमआईएम के साथ कोई औपचारिक गठबंधन नहीं किया और पार्टी के मूल सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं हुआ।
भाजपा की माया धुले अकोट नगर परिषद की महापौर चुनी गई हैं, जबकि रवि ठाकुर को समूह नेता बनाया गया है। यह गठबंधन जिला प्रशासन में पंजीकृत कर लिया गया है ताकि 13 जनवरी को होने वाले उप-महापौर और समिति चुनावों से पहले सभी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें।
एआईएमआईएम नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने भाजपा के दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी का राजनीतिक रुख भाजपा के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने स्पष्ट कर दिया है कि एआईएमआईएम भाजपा के किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं होगी और अकोट के घटनाक्रम पर नाराजगी जताई है। गौरतलब है कि राज्य में भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की राकांपा की महायुति सरकार है। ऐसे में नगर निकाय स्तर पर बने इन कथित गठबंधनों ने न केवल विपक्ष बल्कि सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भी राजनीतिक असहजता बढ़ा दी है।