मुंबई, पांच मई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट की ओर से एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक (एमडी) एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शशिधर जगदीशन के खिलाफ दायर रिश्वतखोरी के मामले को मंगलवार को खारिज कर दिया।
अदालत ने ट्रस्ट की शिकायत को बैंक की ओर से 65 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि की वसूली के लिए शुरू की गई कार्यवाही के “जवाब में उठाया गया कदम” करार दिया।
न्यायमूर्ति एम एस कार्णिक और न्यायमूर्ति एनआर बोरकर की पीठ ने कहा कि वित्तीय संस्थान ऋण राशि की वसूली के लिए कार्यवाही शुरू करने के लिए बाध्य हैं। उसने कहा कि शिकायत ट्रस्ट के पूर्व और वर्तमान न्यासियों के बीच कड़वाहट और तनावपूर्ण संबंधों का नतीजा थी।
लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट बांद्रा में लीलावती अस्पताल का संचालन करता है।
उच्च न्यायालय ने कहा, “हमारी राय में यह शिकायत ट्रस्ट के खिलाफ शुरू की गई वसूली कार्यवाही के जवाब में उठाए गए कदम के अलावा और कुछ नहीं है। रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री शिकायतकर्ता की ओर से किए गए दावे की जांच को किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराती है।”
अदालत ने शिकायतकर्ता के इस दावे को भी मानने से इनकार कर दिया कि ट्रस्ट के संस्थापक किशोर मेहता की मौत 2024 में बैंक की ओर से डाले गए दबाव के कारण हुई थी। उसने कहा कि इसके लिए बैंक अधिकारियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।
उच्च न्यायालय ने जगदीशन की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने और मजिस्ट्रेट अदालत के मई 2025 के उस आदेश को निरस्त करने का अनुरोध किया गया था, जिसके तहत पुलिस जांच का आदेश दिया गया था।
यह मामला एचडीएफसी बैंक की ओर से मेहता परिवार के स्वामित्व और प्रबंधन वाली कंपनी ‘स्प्लेंडोर जेम्स लिमिटेड’ से 65.22 करोड़ रुपये की बकाया राशि की वसूली के प्रयासों से जुड़ा है।
ट्रस्ट ने अपने प्रतिनिधि प्रशांत मेहता के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ट्रस्ट के एक न्यासी से जुड़ी एक कंपनी से संबंधित ऋण वसूली कार्यवाही के दौरान मिली एक डायरी से पता चलता है कि जगदीशन को कुल 2.05 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था, जो कथित तौर पर चेतन मेहता के निर्देशों पर किया गया था।
भाषा पारुल दिलीप
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