सिनेमैटोग्राफिक फिल्म जीएसटी के तहत आईटी सॉफ्टवेयर नहीं : मुंबई उच्च न्यायालय

सिनेमैटोग्राफिक फिल्म जीएसटी के तहत आईटी सॉफ्टवेयर नहीं : मुंबई उच्च न्यायालय

सिनेमैटोग्राफिक फिल्म जीएसटी के तहत आईटी सॉफ्टवेयर नहीं : मुंबई उच्च न्यायालय
Modified Date: September 23, 2026 / 05:02 pm IST
Published Date: September 23, 2026 5:02 pm IST

मुंबई, 23 सितंबर (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने करण जौहर की दो प्रोडक्शन कंपनियों पर 79.7 करोड़ रुपये से अधिक के कर की मांग को रद्द करते हुए कहा है कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून के तहत सिनेमैटोग्राफिक फिल्म आईटी सॉफ्टवेयर नहीं है, भले ही उसे डिजिटल लिंक या हार्ड डिस्क के जरिये उपलब्ध किया गया हो।

न्यायमूर्ति एम.एस. कार्णिक और न्यायमूर्ति संदेश पाटिल की पीठ ने 10 सितंबर को जौहर की धर्मा प्रोडक्शंस और धर्माटिक एंटरटेनमेंट की याचिका पर दिए गए फैसले में कहा कि कर वर्गीकरण के लिए (सामग्री) उपलब्ध करने का तरीका मायने नहीं रखता।

अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह पता चले कि कोई सिनेमैटोग्राफिक फिल्म, जो एक ‘ऑडियो-विजुअल’ सामग्री है, वह ‘‘सूचना प्रौद्योगिकी सॉफ्टवेयर’’ की कानूनी परिभाषा को कैसे पूरा कर सकती है।

उच्च न्यायालय ने कहा कि सामग्री को चाहे भौतिक रूप से (हार्ड डिस्क के जरिये) भेजा जाए या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से, उपलब्ध करने का तरीका इसके वर्गीकरण को तय नहीं कर सकता। अदालत ने यह भी कहा कि डिजिटल सामग्री को सॉफ्टवेयर के समान मानने का कोई कानूनी आधार नहीं है।

यह विवाद फिल्मों के कॉपीराइट लाइसेंसिंग के वर्गीकरण से संबंधित है।

कर अधिकारियों ने इन लेनदेन को ‘सर्विस अकाउंटिंग कोड’ 998340 के तहत आईटी सॉफ्टवेयर की लाइसेंसिंग माना, जिस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है।

राज्य के कर विभाग ने 2017-18 और 2020-21 वित्तीय वर्ष के बीच की अवधि के लिए 79.7 करोड़ रुपये के कर की मांग की थी। विभाग ने दावा किया था कि डिजिटल लिंक या हार्ड डिस्क के जरिये फिल्म सामग्री उपलब्ध कराना आईटी सॉफ्टवेयर सेवा के दायरे में आता है।

इसके बाद धर्मा प्रोडक्शंस और धर्माटिक एंटरटेनमेंट ने इस मांग को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।

भाषा सुभाष सुरेश

सुरेश


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