सड़क दुर्घटना के पीड़ित परिवार को 1.09 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए: न्यायाधिकरण

सड़क दुर्घटना के पीड़ित परिवार को 1.09 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए: न्यायाधिकरण

सड़क दुर्घटना के पीड़ित परिवार को 1.09 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए: न्यायाधिकरण
Modified Date: June 27, 2026 / 08:51 pm IST
Published Date: June 27, 2026 8:51 pm IST

मुंबई, 26 जून (भाषा) मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने सड़क दुर्घटना के पीड़ित चार लोगों के एक परिवार को कुल मिलाकर लगभग 1.09 करोड़ रुपये का मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया है। इस परिवार में दो बच्चे भी शामिल हैं, जो 2018 में बिहार में हुए हादसे में दिव्यांग हो गए थे।

पीड़ितों में शामिल दो साल के लड़के को ऐसी चोट लगी थी जिसके कारण उसके दाहिने पैर को घुटने के नीचे से काटना पड़ा।

एमएसीटी ने कहा कि अंग कटने से बच्चे के चलने-फिरने और खेलकूद में हिस्सा लेने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होगी, जिससे उसके व्यक्तित्व और भविष्य में शादी की संभावनाओं पर भी बुरा असर पड़ेगा।

पीठासीन सदस्य गौरी कवडिकर ने 25 जून को चार अलग-अलग आदेश जारी किए, जिनमें इस बात पर ज़ोर दिया गया कि इस दुर्घटना का उस छोटे बच्चे और उसकी पांच साल की बहन पर क्या असर पड़ा।

लड़की के सिर और चेहरे पर चोट आई थी, तथा उसकी ‘ओक्सिपिटल’ हड्डी (खोपड़ी के पिछले और निचले हिस्से को बनाने वाली हड्डी) टूट गई थी।

एमएसीटी ने कहा कि इस स्थायी विकृति का उसके व्यक्तित्व और भविष्य की संभावनाओं पर बुरा असर पड़ेगा।

इसने बच्चों के लिए कुल मिलाकर 56 लाख रुपये से ज़्यादा की राशि दिए जाने का निर्देश दिया।

बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के लिए, न्यायाधिकरण ने निर्देश दिया कि उनके संबंधित मुआवज़े की राशि को उनके बालिग होने तक किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में सावधि जमा के रूप में सुरक्षित रखा जाए।

न्यायाधिकरण ने कहा कि गैंग्रीन होने की वजह से बच्चों की मां का दाहिना हाथ कंधे के पास से काटना पड़ा, जिससे उसे 88 प्रतिशत स्थायी आंशिक दिव्यांगता हो गई।

इसने बीमा कंपनी को उसे 41,75,576 रुपये का मुआवज़ा दिए जाने का निर्देश दिया।

यह दुर्घटना 6 दिसंबर 2018 की सुबह बिहार के मधुबनी ज़िले में हुई थी।

मुंबई निवासी संबंधित परिवार मोटरसाइकिल पर जा रहा था, जिसे तेज़ रफ़्तार ट्रक ने टक्कर मार दी।

बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि मोटरसाइकिल पर चार लोग सवार थे और दुर्घटना उनकी लापरवाही का नतीजा थी।

हालांकि, न्यायाधिकरण ने इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि मोटरसाइकिल पर पीछे बैठे दो बच्चों की तरफ से कोई लापरवाही नहीं थी।

मोटरसाइकिल चलाने वाले बच्चों के चाचा को भी 46 प्रतिशत स्थायी आंशिक दिव्यांगता हो गई, जिसे 10,80,480 रुपये दिए जाने का निर्देश दिया गया।

एमएसीटी ने आदेश दिया कि ट्रक मालिक दीपक कुमार और बीमा कंपनी चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी मिलकर लगभग 1.09 करोड़ रुपये का कुल मुआवज़ा प्रदान करें।

भाषा

नेत्रपाल प्रशांत

प्रशांत


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