महाराष्ट्र में कांग्रेस का ‘ईसीआई-नेट’ के दुरुपयोग का आरोप, सीईसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग

महाराष्ट्र में कांग्रेस का ‘ईसीआई-नेट’ के दुरुपयोग का आरोप, सीईसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग

महाराष्ट्र में कांग्रेस का ‘ईसीआई-नेट’ के दुरुपयोग का आरोप, सीईसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग
Modified Date: September 29, 2026 / 01:47 pm IST
Published Date: September 29, 2026 1:47 pm IST

मुंबई, 29 सितंबर (भाषा) कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई ने मतदाता पात्रता तय करने संबंधी निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों के वैधानिक अधिकारों को ‘ईसीआई-नेट’ प्रणाली के जरिए कमजोर का आरोप लगाते हुए मंगलवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

मीडिया में आईं खबरों का हवाला देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे ने दावा किया कि कुछ अधिकारियों ने इस सॉफ्टवेयर का गलत इस्तेमाल करके मतदाताओं का वर्गीकरण किया और मतदाता सूची में गड़बड़ियां कीं।

लोंढे की यह प्रतिक्रिया उन खबरों के बाद आई है जिनमें कहा गया था कि महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने उप-विभागीय अधिकारियों (एसडीएम) के अधिकारों को बहाल करने की मांग की है।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि मतदाता सूची में कोई विसंगति या गड़बड़ी होती है, तो यह तय करने का वैधानिक अधिकार कि कौन मतदाता है और कौन नहीं, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) के पास ही होता है जो एसडीएम हैं।’’

उन्होंने समाचार पत्रों की खबरों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना और वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग सहित अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से ‘ईसीआई-नेट’ प्रणाली के माध्यम से ये अधिकार छीने जा रहे हैं।

‘ईसीआई-नेट’ इस वर्ष की शुरुआत में शुरू किया गया एक ऐसा मंच है, जिसके तहत मतदाता सूची सेवाओं सहित निर्वाचन आयोग के 40 से अधिक मौजूदा एप्लिकेशन और वेबसाइट को एक ही मंच पर लाया गया है।

अंग्रेजी दैनिक ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े फैसलों और आदेशों को लेकर कई मौकों पर आपत्तियां जताई थीं जिसके बाद से निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त निशाने पर आ गए हैं।

विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार पर सत्ताधारी दल के पक्ष में एकतरफा फैसले लेने का आरोप लगाया है।

लोंढे ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाता सूची का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी कार्यकर्ताओं को एक ऑनलाइन एप्लिकेशन उपलब्ध कराया गया है ताकि वे अलग-अलग रंगों का इस्तेमाल कर मतदाताओं का वर्गीकरण कर सकें।

उन्होंने दावा किया कि ‘भगवा’ रंग भाजपा के मतदाताओं का, दूसरा रंग विपक्षी मतदाताओं का और नीला रंग तटस्थ मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करता है।

भाषा खारी वैभव

वैभव


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