अदालत ने मराठी भाषा नियम में ढील के बाद कैब चालकों की अर्जी का निस्तारण किया

अदालत ने मराठी भाषा नियम में ढील के बाद कैब चालकों की अर्जी का निस्तारण किया

अदालत ने मराठी भाषा नियम में ढील के बाद कैब चालकों की अर्जी का निस्तारण किया
Modified Date: August 29, 2026 / 05:24 pm IST
Published Date: August 29, 2026 5:24 pm IST

मुंबई, 29 अगस्त (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा मराठी सीखने की समय सीमा एक साल बढ़ाए जाने की जानकारी दिये जाने के बाद शनिवार को चार कैब चालकों की ओर से दाखिल याचिका का निपटारा कर दिया जिसमें मराठी भाषा संबंधी नियम पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था।

महाराष्ट्र सरकार की अतिरिक्त वकील ज्योति चव्हाण ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ को बताया कि सरकार ने ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को भाषा सीखने के लिए दिए गए समय को एक साल और बढ़ाने का फैसला किया है।

उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा दी गई जानकारी के बाद याचिका का निस्तारण कर दिया।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बृहस्पतिवार को एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद समय-सीमा बढ़ाने की घोषणा की, जिससे गैर-मराठी चालकों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई रोक दी गई और उन्हें भाषा सीखने के लिए और समय मिल गया।

अधिवक्ता विवेक शुक्ला के जरिए दाखिल जनहित याचिका में कहा गया था कि 12 अगस्त की सरकारी अधिसूचना नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।

मोहम्मद कासिम अहमद, मोहम्मद तौसीफ़ शेख, सियाद अहमद और सादिक नासिर अली खान नामक याचिकार्ताओं ने दावा किया था कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 19 (व्यापार और पेशा करने की आजादी) और 21 (जीवन का अधिकार) के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और मोटर वाहन अधिनियम के भी खिलाफ है, क्योंकि यह अधिनियम ड्राइविंग लाइसेंस के लिए किसी भाषा की शर्त नहीं रखता है।

याचिका में दलील दी गई, ‘‘मोटर वाहन अधिनियम राज्य सरकार को चालक के लिए किसी भाषा की कामकाजी जानकारी को योग्यता, बैज या परमिट की शर्त के तौर पर तय करने का कोई अधिकार नहीं देता है, और न ही इस आधार पर बैज को सस्पेंड या रद्द करने का कोई अधिकार देता है।’’

उन्होंने दलील दी कि मराठी भाषा की ‘कामकाजी जानकारी’ वाले नियम को लागू करने से लाखों गरीब और प्रवासी चालकों (जिनमें वे खुद भी शामिल हैं) के सामने अपने बैज निलंबित होने और परमिट रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा।

याचिका में उच्च न्यायालय से फैसले के अमल पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राज्य सरकार ने अप्रैल में घोषणा की थी कि गैर-मराठी चालकों को बुनियादी मराठी सीखनी होगी और उनके लिए मराठी कक्षाएं आयोजित करते हुए 15 अगस्त की समय-सीमा तय की गई थी।

भाषा धीरज पवनेश

पवनेश


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