गर्भवती को स्ट्रेचर पर ले गए ग्रामीण; स्वास्थ्य विभाग ने कहा : समय पर मिली मदद

गर्भवती को स्ट्रेचर पर ले गए ग्रामीण; स्वास्थ्य विभाग ने कहा : समय पर मिली मदद

गर्भवती को स्ट्रेचर पर ले गए ग्रामीण; स्वास्थ्य विभाग ने कहा : समय पर मिली मदद
Modified Date: August 28, 2026 / 10:27 pm IST
Published Date: August 28, 2026 10:27 pm IST

गढ़चिरौली, 28 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और उफनती बाढ़ के कारण ग्रामीणों को 26-वर्षीय एक गर्भवती महिला को स्ट्रेचर पर ले जाने और एक जलस्रोत को पार करने के लिए मजबूर होना पड़ा, हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों का दावा है कि उनकी ओर से समय पर चिकित्सा सहायता प्रदान की गई थी।

यह मामला एटापल्ली तहसील के कोइंदुल गांव की रहने वाली छाया नैताम से जुड़ा है। शुक्रवार सुबह उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हुई, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ी।

हालांकि, दूरदराज के इस गांव को जोड़ने वाली पक्की सड़क और पुल नहीं होने तथा भारी बारिश के कारण रास्ते में बाढ़ का पानी जमा होने से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) की एम्बुलेंस सीधे गांव तक नहीं पहुंच सकी।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने महिला को स्ट्रेचर पर लिटाया और अपनी जान जोखिम में डालकर उफनते पानी के बीच से उसे पार कराया। इसके बाद महिला को कसनसुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने और खबरें सामने आने के बाद जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रताप शिंदे ने एक विस्तृत बयान जारी कर घटना के आधिकारिक क्रम को स्पष्ट किया और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई का बचाव किया।

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि भारी जलभराव के कारण रास्ता बाधित होने से उसके द्वारा भेजी गई एम्बुलेंस सुबह करीब 8:30 बजे बाढ़ के पानी से भरे नाले के पास रुक गई। इसने बताया कि स्थानीय लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों की मदद से महिला को स्ट्रेचर के माध्यम से सुरक्षित रूप से पानी से भरा रास्ता पार कराया गया और सुबह नौ बजे एम्बुलेंस तक पहुंचाया गया।

महिला को सुबह 9:30 बजे कसनसुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया।

स्वास्थ्य प्रशासन ने कहा कि गंभीर बुनियादी ढांचागत समस्याओं और दुर्गम भौगोलिक स्थिति के बावजूद त्वरित सूचना और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय से महिला को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने और उसकी हालत स्थिर करने में मदद मिली तथा उपचार में कोई गंभीर देरी नहीं हुई।

भाषा शुभम सुरेश

सुरेश


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