अदालत ने धन शोधन मामले में खरात के खिलाफ आरोपपत्र का संज्ञान लिया, आरोपी को समन जारी किया
अदालत ने धन शोधन मामले में खरात के खिलाफ आरोपपत्र का संज्ञान लिया, आरोपी को समन जारी किया
मुंबई, नौ सितंबर (भाषा) मुंबई की एक विशेष अदालत ने धन शोधन मामले में, स्वयंभू बाबा अशोक खरात और अन्य लोगों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय के आरोपपत्र का संज्ञान लिया है।
अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि आरोपियों ने धोखाधड़ी वाली गतिविधियों के जरिए सुनियोजित तरीके से अपराध से कमाई की थी।
धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गठित विशेष अदालत ने कहा कि सबूतों से पता चलता है कि खरात ने अपने सहयोगियों की मदद से लोगों को अपने जाल में फंसाने का काम ‘‘लगातार और सुनियोजित तरीके’’ से किया।
उसने खुद को ‘कृष्ण’ का अवतार बताया और दावा किया कि उसके पास धार्मिक, आध्यात्मिक और अलौकिक शक्तियां हैं।
मंगलवार को अभियोजन पक्ष की शिकायत (आरोपपत्र) पर संज्ञान लेने के बाद, विशेष पीएमएलए अदालत के न्यायाधीश एस.वी. सहारे ने खरात और मामले के पांच अन्य आरोपियों को समन जारी किया।
उन्हें 22 सितंबर को अदालत में पेश होने के लिए कहा गया है।
ईडी के बयान के मुताबिक, जुलाई में मुंबई की पीएमएलए अदालत में अभियोजन की शिकायत दर्ज की गई थी, जिसमें धन शोधन मामले में खरात, उसकी पत्नी कल्पना और चार अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था।
ईडी ने दावा किया है कि खरात, जो अभी न्यायिक हिरासत में जेल में है, केंद्रीय एजेंसी की जांच के दायरे में आए 47 करोड़ रुपये से अधिक के धन शोधन मामले का सरगना और मुख्य लाभार्थी है।
ईडी ने छह अप्रैल को खरात के खिलाफ पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया था। यह कार्रवाई नासिक पुलिस द्वारा उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी का संज्ञान लेते हुए की गई, जिसमें उस पर कई महिला पीड़ितों से जबरन वसूली करने सहित अन्य आरोप लगाए गए थे।
अदालत के आदेश में कहा गया है कि खरात और सह-आरोपियों ने अकूत गैर-कानूनी संपत्ति अर्जित की जो पीएमएलए के तहत अपराध की श्रेणी में आता है।
अदालत ने कहा, ‘‘सामने आए तथ्यों से यह भी पता चलता है कि अन्य आरोपियों ने इन गतिविधियों में खरात की सक्रिय रूप से मदद और उकसावा दिया।’’
न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि शुरुआती जांच से यह साबित होता है कि सभी आरोपियों ने मुख्य अपराधों से कमाई की, उसे वैध धन के तौर पर दिखाया और इस तरह पीएमएलए के संबंधित प्रावधानों के तहत धन शोधन का अपराध किया।
इस प्रकार, अदालत ने माना कि सभी आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लेने और उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
भाषा सुभाष प्रशांत
प्रशांत

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