मुंबई, 18 सितंबर (भाषा) शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि यदि निर्वाचन आयोग दबाव में फैसले ले रहा है तो देश में लोकतंत्र खतरे में है।
राउत ने यह टिप्पणी आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद की।
राउत ने पत्रकारों से कहा कि तृणमूल कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तृणमूल कांग्रेस को विभाजित करने का आरोप लगाया।
निर्वाचन आयोग ने ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुटों के नेताओं का पक्ष सुनने के बाद बृहस्पतिवार रात जारी अपने अंतरिम आदेश में कहा कि इस मामले में ‘चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968’ के प्रावधानों के तहत आयोग की ओर से ठोस निर्णय लिए जाने की आवश्यकता है।
आयोग ने कहा कि छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों में किसी भी गुट को अंतिम फैसला होने तक ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम या पार्टी के आरक्षित ‘पुष्प और तृण’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी।
राउत ने कहा, ‘‘ममता बनर्जी ने पार्टी की स्थापना की और उसके उद्देश्य तय किए। उन्होंने विधायकों एवं सांसदों को टिकट भी दिए, लेकिन भाजपा ने पार्टी को तोड़ दिया। इसका यह मतलब नहीं है कि पार्टी बागियों की हो गई। पार्टी ममता बनर्जी की है।’’
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को चुनाव चिह्न पर रोक नहीं लगानी चाहिए थी और बागी गुट को कोई दूसरा चुनाव चिह्न लेकर चुनाव लड़ना चाहिए।
राउत ने कहा, ‘‘अगर निर्वाचन आयोग दबाव में ऐसे फैसले कर रहा है तो लोकतंत्र खतरे में है।’’
निर्वाचन आयोग के इस फैसले की विपक्षी दलों ने तीखी आलोचना की है और तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी विवाद के बीच ममता बनर्जी के गुट का समर्थन किया है।
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सिम्मी वैभव
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