मराठा सम्राज्य का मानचित्र एनसीईआरटी से हटाने के खिलाफ वंशजों ने अदालत का रुख किया

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मराठा सम्राज्य का मानचित्र एनसीईआरटी से हटाने के खिलाफ वंशजों ने अदालत का रुख किया

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  • Publish Date - May 6, 2026 / 08:48 PM IST,
    Updated On - May 6, 2026 / 08:48 PM IST

मुंबई, छह मई (भाषा) राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक से मराठा साम्राज्य के मानचित्र को ‘हटाने’ के खिलाफ मराठा राजशाही परिवार के वंशजों ने अन्य नागरिकों के साथ बंबई उच्च न्यायालय का रुख किया है।

राजशाही परिवार के वंशजों और नागरिकों ने मंगलवार को दायर अपनी जनहित याचिका मानचित्र संख्या 3.11 को फिर से शामिल करने का अनुरोध किया है। उक्त मानचित्र में दर्शाया गया है कि 1759 ईस्वी में मराठा साम्राज्य का क्षेत्रीय विस्तार तंजावुर (वर्तमान तमिलनाडु में) से लेकर पेशावर (पाकिस्तान में) तक था।

याचिकाकर्ताओं में नागपुर से राजे मुधोजीराव राजे अजीतसिंहराव भोंसले, छत्रपति शिवाजी महाराज की मां राजमाता जीजामाता के वंशज शिवाजी दत्तात्रेय राजे जाधव और रायगढ़ से रघुजीराजे शाहजीराजे आंग्रे समेत अन्य नागरिक शामिल हैं।

अधिवक्ता आशीषराजे गायकवाड़ के जरिये दाखिल जनहित याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की आठवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक (हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू माध्यम) से मानचित्र को हटाने के एनसीईआरटी के ‘‘एकतरफा, मनमाना, अपारदर्शी और प्रक्रियात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण निर्णय’’ से ‘‘ अति व्यथित’’ हैं।

याचिका में दावा किया गया कि मानचित्र को हटाने का निर्णय लेने से पहले किसी भी ऐतिहासिक दस्तावेज, राजपत्र या अकादमिक शोध का संदर्भ नहीं लिया गया।

इसमें दावा किया, ‘‘इस प्रकार से किसी हिस्से को हटाना संविधान के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, जिससे छात्रों को सटीक ऐतिहासिक शिक्षा से वंचित किया जा रहा है और सांस्कृतिक पहचान के अधिकारों का हनन हो रहा है।’’

याचिका में उच्च न्यायालय से एनसीईआरटी के फैसले को रद्द करने और सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में मानचित्र को दोबारा शामिल करने का आदेश देने का आग्रह किया गया। इस जनहित याचिका पर इस सप्ताह सुनवाई होने की उम्मीद है।

भाषा धीरज माधव

माधव