राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोप से श्रद्धालु आहत हैं: शिंदे
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोप से श्रद्धालु आहत हैं: शिंदे
मुंबई, 10 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे में कथित चोरी से श्रद्धालुओं को दुख पहुंचा है। शिंदे ने जोर देकर कहा कि इस मामले में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मानसून सत्र के आखिरी दिन विधान परिषद में शिंदे ने अतीत में मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर के दान पात्र को ‘लूटे’ जाने का आरोप लगाया और जानना चाहा कि उस समय की सरकार ने इसकी जांच का आदेश क्यों नहीं दिया। शिंदे का यह इशारा तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले प्रशासन की ओर था।
शिवसेना प्रमुख शिंदे ने जोर देकर कहा कि जिस भव्य राम मंदिर का जनवरी 2024 में उद्घाटन किया गया उसमें प्राप्त दान के प्रबंधन में किसी भी तरह की अनियमितता का समर्थन कोई नहीं कर सकता।
विपक्ष द्वारा लाए गए ‘अंतिम सप्ताह प्रस्ताव’ का जवाब देते हुए उन्होंने प्रतिद्वंद्वी शिवसेना (उबाठा) पर निशाना साधा। शिंदे ने शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे का नाम लिए बगैर आरोप लगाया कि जो लोग अयोध्या मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी की आलोचना कर रहे हैं, उन्हीं के सहयोगियों ने देश के सबसे अमीर मंदिरों में से एक सिद्धिविनायक मंदिर को ‘लूटने का पाप’ किया था।
‘‘राम मंदिर में जो हुआ, उसका कोई भी समर्थन नहीं कर सकता। राम भक्तों को दुख पहुंचा है। इस मामले में कड़ी कार्रवाई की जा रही है। (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी और योगी (उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ) किसी को भी नहीं बख्शेंगे।’’
शिंदे ने कहा, ‘‘जो लोग (राम मंदिर को प्राप्त दान में चोरी की) आलोचना कर रहे हैं… उनके ही साथियों ने सिद्धिविनायक मंदिर का दान-पात्र लूटने का पाप किया था। उस समय की सरकार ने इसकी जांच के आदेश क्यों नहीं दिए?’’
विधान परिषद में शिंदे के बयान के बाद, जाने-माने मराठी अभिनेता आदेश बांदेकर (जो पहले श्री सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष रह चुके हैं) ने कहा कि अगर वह किसी भी गड़बड़ी के दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें मंदिर के सामने फांसी दी जानी चाहिए। बांदेकर पूर्व में अविभाजित शिवसेना से जुड़े थे।
शिंदे ने पूर्व मुख्यमंत्री ठाकरे का नाम लिए बिना कहा, ‘‘हिंदुत्व कोई ऐसी टी-शर्ट नहीं है जिसे जब चाहें बदल लिया जाए। क्या आपका हिंदुत्व सिद्धिविनायक को लूटना है? क्या सावरकर को ‘माफी-वीर’ कहने वालों की गोद में बैठना हिंदुत्व है? क्या (शिवसेना संस्थापक) बालासाहेब (ठाकरे) के आदर्शों को छोड़ना हिंदुत्व है?’’
भाषा संतोष शोभना
शोभना

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