एल्गार परिषद मामला: अदालत ने केरल यात्रा की अनुमति का अनुरोध करने वाली आरोपी की याचिका खारिज की

एल्गार परिषद मामला: अदालत ने केरल यात्रा की अनुमति का अनुरोध करने वाली आरोपी की याचिका खारिज की

एल्गार परिषद मामला: अदालत ने केरल यात्रा की अनुमति का अनुरोध करने वाली आरोपी की याचिका खारिज की
Modified Date: March 20, 2026 / 10:31 pm IST
Published Date: March 20, 2026 10:31 pm IST

मुंबई, 20 मार्च (भाषा) महाराष्ट्र के मुंबई स्थित राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने एल्गार परिषद-माओवादी संबंधों के मामले में आरोपी हनी बाबू को उसकी बुजुर्ग मां के साथ ईद मनाने के लिए दो महीने के लिए केरल जाने की अनुमति देने का अनुरोध करने वाली याचिका को खारिज कर दिया। बुधवार को अपने फैसले में, विशेष एनआईए न्यायाधीश चकोर बाविस्कर ने बाबू को फटकार लगाई, क्योंकि उन्होंने एक महीने पहले अनुमति न मिलने के बावजूद वैसी ही याचिका दोबारा दायर की। उस समय उन्हें जमानत मिलने पर बंबई उच्च न्यायालय द्वारा लगाए गए शर्तों के कारण अनुमति नहीं दी गई थी।

हनी बाबू को दिसंबर 2025 में बंबई उच्च न्यायालय द्वारा जमानत दी गई, क्योंकि उन्हें बिना मुकदमे के पांच साल से अधिक समय तक लंबी अवधि के लिए हिरासत में रखा गया था

उच्च न्यायालय द्वारा हनी बाबू पर लगाई गई शर्तों में यह शामिल था कि वब बृहत्तर मुंबई में ही रहें और एनआईए अदालत की पूर्व अनुमति के बिना शहर न छोड़ें।

एनआईए के न्यायाधीश ने कहा, “आरोपी ने उच्च न्यायालय के आदेश को बहुत हल्के और लापरवाही से लिया है।”

न्यायाधीश ने यह भी कहा कि ईद मनाने और सर्जरी के बाद की जांच का बहाना अब ‘ज्यादा मायने नहीं रखता’ ,क्योंकि पिछले महीने ही उन्हें पित्ताशय की सर्जरी के लिए केरल जाने और अपनी मां के साथ रहने की अनुमति दी गई थी।

एनआईए अदालत ने कहा कि अगर हनी बाबू कुछ और समय तक अपनी मां के साथ रहना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी मां को मुंबई लाने के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए।

अदालत ने कहा, “चिकित्सा जांच का दूसरा बहाना भी उतना ही अपर्याप्त और असंतोषजनक है। ऑपरेशन के बाद की सभी रिपोर्ट बिल्कुल सामान्य हैं। आरोपी का स्वास्थ्य काफी अच्छा बताया जा रहा है।”

न्यायाधीश ने कहा कि फिर भी अगर उन्हें कोई मेडिकल जांच करवानी है, तो वह मुंबई में ही आसानी से करवा सकते हैं और इस मामूली कारण के लिए उन्हें केरल जाने का भारी यात्रा खर्च उठाने की जरूरत नहीं है।

आदेश में कहा गया कि मुंबई में निजी, चैरिटी, नगर निगम और सरकारी अस्पतालों में विश्व स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।

भाषा जितेंद्र दिलीप

दिलीप


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