महाराष्ट्र : तीन करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में बैंक ऑफ इंडिया का पूर्व अधिकारी और अन्य दोषी करार
महाराष्ट्र : तीन करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में बैंक ऑफ इंडिया का पूर्व अधिकारी और अन्य दोषी करार
मुंबई, 18 मार्च (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के मामलों की सुनवाई करने वाली यहां की एक विशेष अदालत ने 2012 में बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में दो व्यक्तियों को पांच-पांच साल और दो अन्य को तीन-तीन साल कारावास की सजा सुनाई।
सीबीआई के मुताबिक यह मामला बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) को फर्जी साख पत्र के जरिये तीन करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाने से जुड़ा है।
अदालत ने निजी कंपनी ‘इंफिनिटी ट्रांसमिशन’ के मालिक हरित मेहता को पांच साल कारावास की सजा सुनाई गई और उस पर 3.50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।
न्यायाधीश ने कंपनी के निदेशक अभय मेहता को भी पांच वर्ष सश्रम कारावास की सजा और एक करोड़ रुपये का अर्थदंड लगाया।
अदालत ने बैंक के पूर्व अधिकारी मनोजकुमार माथुर और एक अन्य आरोपी इलेश शाह को तीन-तीन साल कारावास और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
विशेष न्यायाधीश अमित खरकर ने अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान जमानत परिसंपत्ति की जालसाजी) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी पाया।
सीबीआई ने बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक माथुर पर अन्य लोगों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया था।
केंद्रीय एजेंसी के अनुसार, राष्ट्रीयकृत बैंक की नरीमन प्वाइंट शाखा को 20 जुलाई, 2009 को एचडीएफसी बैंक द्वारा जयंत एग्रो ऑर्गेनिक लिमिटेड की ओर से जारी किया गया एक साख पत्र प्राप्त हुआ था, जिसे भुगतान के लिए भेजा गया था।
सीबीआई ने अदालत को बताया कि अभय और हरित मेहता ने इसके बाद रकम निकाल ली। लेकिन बाद में जानकारी मिली कि साख पत्र जाली था, जिससे बैंक ऑफ इंडिया को 3.4 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
भाषा धीरज देवेंद्र
देवेंद्र

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