पूर्व सरकारी कर्मचारी 800 रुपये की रिश्वत मामले में 19 साल बाद बरी

पूर्व सरकारी कर्मचारी 800 रुपये की रिश्वत मामले में 19 साल बाद बरी

पूर्व सरकारी कर्मचारी 800 रुपये की रिश्वत मामले में 19 साल बाद बरी
Modified Date: May 29, 2026 / 06:22 pm IST
Published Date: May 29, 2026 6:22 pm IST

ठाणे, 29 मई (भाषा) ठाणे की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 800 रुपये रिश्वत लेने के आरोपी केंद्र सरकार के एक पूर्व कर्मचारी को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि रिश्वत की मांग का पुख्ता सबूत न होने के कारण मात्र करेंसी नोटों की बरामदगी उसे दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है।

विशेष न्यायाधीश डी. एस. देशमुख ने बृहस्पतिवार को अरविंद मोतीराम सावंत को बरी कर दिया। अरविंद अगस्त 2006 में कथित अपराध के समय नवी मुंबई के सीबीडी बेलापुर स्थित रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) के कार्यालय में लिपिक के रूप में कार्यरत थे।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता ने अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू करने के लिए एक निजी कंपनी के गठन दस्तावेजों और गठन के मूल नियम की प्रमाणित प्रतियां तत्काल प्राप्त करने के लिए आरओसी से संपर्क किया था।

आरोप था कि सावंत ने प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए 1,000 रुपये की मांग की थी, जिसे बाद में घटाकर 800 रुपये कर दिया गया। सूचना मिलने पर सीबीआई ने 22 अगस्त 2006 को जाल बिछाया और आरोपी से ‘रंगे हाथ’ नोट बरामद किए।

हालांकि, जिरह के दौरान, बचाव पक्ष ने यह साबित कर दिया कि आरोपी प्रमाणित प्रतियां जारी करने के लिए अंतिम हस्ताक्षरकर्ता नहीं था और उसके पास आरओसी के पास मौजूद दस्तावेजों को जारी करने का अधिकार नहीं था।

अदालत ने कहा, ‘अगर किसी आरोपी से रंगे हाथ पैसे बरामद होते हैं, लेकिन उससे पहले रिश्वत मांगने का पक्का और भरोसेमंद सबूत नहीं है या वह सबूत पर्याप्त नहीं है, तो केवल पैसे की बरामदगी के आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता।’

अदालत ने अरविंद सावंत को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

भाषा

शुभम रंजन

रंजन


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