विषम परिस्थितियों से उबरकर पूर्व नक्सली की बेटी बनी सिविल इंजीनियर

Ads

विषम परिस्थितियों से उबरकर पूर्व नक्सली की बेटी बनी सिविल इंजीनियर

  •  
  • Publish Date - August 31, 2026 / 08:48 PM IST,
    Updated On - August 31, 2026 / 08:48 PM IST

गडचिरोली (महाराष्ट्र), 31 अगस्त (भाषा) उनके पिता कभी एक माओवादी ‘दलम’ का हिस्सा थे। लेकिन हाल ही में प्रशिक्षु इंजीनियर के रूप में काम शुरू करने वाली अरविंदा बारसागडे (20) के लिए यह एक ऐसा अतीत है, जिसे उनका परिवार पीछे छोड़ चुका है।

सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल करने के बाद, वह जिले के हेदरी स्थित ‘लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी’ के ‘एलटी गोंडवाना स्किल हब’ से जुड़ गई थीं और अब कंपनी की टाउनशिप परियोजना में काम कर रही हैं

पूर्वी महाराष्ट्र के इस जिले की सीमा छत्तीसगढ़ से लगती है और इसे कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। मार्च 2026 में केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र को नक्सल मुक्त घोषित किया।

अरविंदा सिरोंचा तहसील के भोगापुर गांव में पली-बढ़ीं। उस गांव में न तो बिजली थी और न ही सड़कें थीं।

उन्होंने बताया कि उनके पिता राजबाबू बारसागडे करसपल्ली ग्राम पंचायत में काम करते थे। लेकिन कुछ समस्याओं के कारण उन्होंने नौकरी छोड़ दी और वर्ष 2005 में माओवादियों से जुड़ गए।

उनकी मां लता को अगले पांच वर्षों तक काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अरविंदा को याद है कि कभी-कभी उनकी मां उन्हें अपने पति राजबाबू की तलाश में जंगलों में ले जाया करती थीं।

इसके बाद राजबाबू बारसागडे ने वर्ष 2010 में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अरविंदा ने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और पिछले साल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स उत्तीर्ण किया।

वर्तमान में वह ‘लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी’ के आलदंडी में अपने कर्मचारियों के लिए बन रही नयी टाउनशिप में एक प्रशिक्षु साइट इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं, हालांकि यह उनके सपनों की मंजिल नहीं है।

उनका कहना है कि वह काम करने के साथ-साथ अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं और बी.टेक (बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी) की डिग्री हासिल करना चाहती हैं।

वह इस बात से खुश हैं कि उन्होंने अपने माता-पिता, विशेषकर अपनी मां को गौरवान्वित किया, जिन्होंने बहुत संघर्ष झेला है।

अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने अपनी मां के अलावा अपने कॉलेज के शिक्षक अनिल दामोडे और अधिवक्ता कविता मोहरकर को दिया।

अरविंदा ने बताया कि दामोडे ने उन्हें प्रेरित किया और जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण रखना सिखाया, जबकि मोहरकर ने उनके करियर को सही दिशा देने में मार्गदर्शन किया।

भाषा सुमित दिलीप

दिलीप