पारिवारिक विवाद उस समाज में स्पष्ट अंतर दर्शाते हैं जो ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का समर्थन करता है: अदालत

पारिवारिक विवाद उस समाज में स्पष्ट अंतर दर्शाते हैं जो 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का समर्थन करता है: अदालत

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  • Publish Date - January 1, 2026 / 08:43 PM IST,
    Updated On - January 1, 2026 / 08:43 PM IST

मुंबई, एक जनवरी (भाषा) बम्बई उच्च न्यायालय ने उस विडंबना पर खेद व्यक्त किया कि एक समाज जो विश्व के सामने ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ का संदेश देता है, वहीं उसके अपने परिवार विरासत को लेकर बिखर रहे हैं।

अदालत ने संपत्ति को लेकर चल रहे अंतहीन विवादों को प्राचीन मूल्यों और आधुनिक वास्तविकता के बीच के अंतर का ‘‘उत्कृष्ट उदाहरण’’ बताते हुए, समाज के व्यापक हित में इस बात पर उम्मीद व्यक्त की कि लंबे समय तक चलने वाले पारिवारिक मुकदमों में कमी आएगी।

न्यायमूर्ति एम एस सोनाक और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने इस सप्ताह की शुरुआत में दिये अपने फैसले में एक बेटी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपनी दिवंगत मां की वसीयत के संबंध में उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र (लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन) जारी करने का अनुरोध किया था। वसीयत के अनुसार, उपनगरीय बांद्रा में परिवार के स्वामित्व वाली संपत्ति उसे और उसके दो भाइयों को दी गई थी।

दो अन्य भाइयों ने अपनी मां की वसीयत पर संदेह जताया था और दावा किया था कि यह मिलीभगत के तहत बनाई गई थी।

अदालत ने मां की वसीयत के संबंध में उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र जारी करने से इनकार करते हुए कहा कि उसकी राय में इसके आसपास संदिग्ध और संदेहास्पद परिस्थितियां मौजूद हैं।

भाषा

देवेंद्र माधव

माधव