सुदूर गढ़चिरौली से लंदन तक : आदिवासी युवक ने मुश्किलें पार कर एलएसई में हासिल किया दाखिला

सुदूर गढ़चिरौली से लंदन तक : आदिवासी युवक ने मुश्किलें पार कर एलएसई में हासिल किया दाखिला

सुदूर गढ़चिरौली से लंदन तक : आदिवासी युवक ने मुश्किलें पार कर एलएसई में हासिल किया दाखिला
Modified Date: September 30, 2026 / 11:44 am IST
Published Date: September 30, 2026 11:44 am IST

गढ़चिरौली, 30 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र के दूरस्थ जिले गढ़चिरौली के 24 वर्षीय आदिवासी युवक विशाल मेश्राम ने गंभीर आर्थिक तंगी, पारिवारिक त्रासदी और कई मुश्किलों में भी अपना हौसला नहीं खोया और अंतत: प्रतिष्ठित लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (एलएसई) में दाखिला लेने में सफलता प्राप्त कर ली।

लखमापुर बोरी गांव के गरीब आदिवासी परिवार से ताल्लुक रखने वाले मेश्राम का चयन एलएसई के स्नातकोत्तर कार्यक्रम ‘एमएससी इन इंटरनेशनल सोशल एंड पब्लिक पॉलिसी’ के लिए हुआ है।

मेश्राम ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि ब्रिटेन में उच्च शिक्षा की उनकी यात्रा को जारी रखने के लिए महाराष्ट्र के जनजातीय विकास विभाग ने करीब 80 लाख रुपये की राज्य छात्रवृत्ति मंजूर की है।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसियों के साथ काम करना है ताकि वंचित और आदिवासी छात्रों को प्रभावित करने वाली विकास संबंधी संरचनात्मक समस्याओं का समाधान किया जा सके और उनके लिए अवसरों तक पहुंच का विस्तार हो।’’

दुनिया के प्रमुख सामाजिक विज्ञान संस्थानों में शामिल एलएसई तक पहुंचने का मेश्राम का सफर व्यक्तिगत संघर्षों से भरा रहा है।

चामोर्शी के मुर्खाला माल इलाके में पले-बढ़े मेश्राम ने बेहद गरीबी में अपना बचपन बिताया। उनके दिवंगत पिता परिवार का भरण-पोषण करने के लिए मजदूरी करते थे, जबकि उनकी मां गंभीर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या से जूझ रही हैं। करीब दो महीने पहले उनके पिता का निधन हो गया।

मेश्राम की पढ़ाई में उनके दादा ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया जो किसान हैं।

उन्होंने 2020 में चामोर्शी के शिवाजी जूनियर कॉलेज से 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की। बाद में उन्होंने बेंगलुरु की अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी से विकास अध्ययन में परास्नातक की डिग्री पूरी की।

मेश्राम ने अपनी शैक्षणिक यात्रा और विदेशी विश्वविद्यालय में आवेदन की प्रक्रिया में मार्गदर्शन देने वाले कई शिक्षकों और संस्थानों के प्रति आभार जताया।

उन्होंने 10वीं कक्षा के अपने शिक्षक सोहम महोरकर के साथ-साथ संकल्प फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. पंकज नारुले का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि नारुले ने उन्हें आर्थिक और भावनात्मक सहयोग दिया।

मेश्राम ने पुणे के छात्रावास के वार्डन उदय महाजन तथा फर्ग्यूसन कॉलेज और अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों के निरंतर मार्गदर्शन के लिए भी उनका आभार जताया।

भाषा मनीषा वैभव

वैभव


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