गडकरी के कार्यालय ने संन्यास की अटकलें खारिज कीं, कहा-ट्रस्ट को लेकर थी ‘अगली पीढ़ी’ वाली टिप्पणी

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गडकरी के कार्यालय ने संन्यास की अटकलें खारिज कीं, कहा-ट्रस्ट को लेकर थी ‘अगली पीढ़ी’ वाली टिप्पणी

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  • Publish Date - August 25, 2026 / 04:36 PM IST,
    Updated On - August 25, 2026 / 04:36 PM IST

नागपुर, 25 अगस्त (भाषा) केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के इस बयान से अटकलें शुरू हो गई हैं कि नयी पीढ़ी को उनके ट्रस्ट के सामाजिक कार्यों की ज़िम्मेदारी संभालनी चाहिए। कुछ मीडिया चैनलों ने इसे उनके सार्वजनिक जीवन से संभावित संन्यास से जोड़कर देखा, लेकिन उनके कार्यालय ने इस दावे का खंडन किया।

गडकरी के कार्यालय ने केंद्रीय मंत्री का रुख स्पष्ट करते हुए एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि उनकी टिप्पणी का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था और वह ख़ास तौर पर लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट के बारे में बात कर रहे थे।

संबंधित ट्रस्ट गडकरी द्वारा ही बनाया गया एक संगठन है जो आदिवासी इलाकों में एकल विद्यालय चलाता है।

इस संदर्भ में, उन्होंने कहा था कि वह अब पहले जितना काम नहीं कर सकते और युवा पीढ़ी को अधिक ज़िम्मेदारी लेने का अवसर दिया जाना चाहिए।

बयान में कहा गया, ‘‘उनकी टिप्पणी स्पष्ट तौर पर ट्रस्ट के कामकाज और भविष्य के नेतृत्व से जुड़ी थी। हालाँकि, कुछ टेलीविज़न चैनल इस बयान को वास्तविक संदर्भ से हटाकर राजनीतिक टिप्पणी के तौर पर पेश कर रहे हैं।’’

गडकरी ने सोमवार को नागपुर के काटोल में ‘एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण वर्ग’ में एक सभा को संबोधित करते हुए लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट के सफर का उल्लेख किया था, जो आदिवासी इलाकों में कई स्कूल चलाता है। उन्होंने ट्रस्ट के काम की प्रशंसा की थी।

ट्रस्ट के सफर और आदिवासी इलाकों में इसके द्वारा किए गए कार्यों का उल्लेख करते उन्होंने नयी पीढ़ी से इसकी ज़िम्मेदारी संभालने का आग्रह किया था और कहा था कि वह खुद पीछे हट जाएंगे, ताकि नयी पीढ़ी ट्रस्ट के सामाजिक कार्यों में काम कर सके।

उन्होंने कहा था, ‘‘सच कहूँ तो, मैं कोई प्रेरणास्रोत नहीं हूँ; आजकल मैं उतना काम नहीं कर पाता। जब मैं कर सकता था, तब मैंने ज़्यादा काम किया। तब से मैंने (मानकर ट्रस्ट के काम में) अपनी भागीदारी कम कर दी है। मैंने सभी से कहा है कि अब यह काम नयी पीढ़ी के हाथों में सौंप दिया जाना चाहिए।’’

गडकरी ने कहा, ‘‘एक दिन यह काम इतना बढ़ जाएगा कि महाराष्ट्र का कोई भी आदिवासी गाँव अंधेरे में नहीं रहेगा और वहाँ विकास की रोशनी होगी। हम सब इसी तस्वीर को बदलना चाहते हैं और इस तस्वीर को बदलने का काम मानकर ट्रस्ट कर रहा है।’’

भाजपा सांसद ने कहा कि मनुष्य को अपना जीवन अच्छी तरह जीना चाहिए और दूसरों को भी अच्छा जीवन जीने में मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘यह काम सामाजिक ज़िम्मेदारी और राष्ट्रीय कर्तव्य है, तथा इसे और बढ़ाया जाना चाहिए।’’

उन्होंने कार्यक्रम में शामिल शिक्षकों से आग्रह किया कि वे अपने भीतर सर्वोत्तम गुण विकसित करें और अपने व्यक्तित्व, कार्यों तथा क्षमताओं को निखारें।

भाषा

नेत्रपाल नरेश

नरेश